• Home
  • News
  • Chants in honor of Maharshi Valmiki echoed through the 'City of Lakes', Nainital! His birth anniversary (Prakatotsav) was celebrated with great fervor, featuring a grand ceremonial procession.

सरोवर नगरी नैनीताल में गूंजे महर्षि वाल्मीकि के जयकारे! भव्य शोभायात्रा के साथ धूमधाम से मनाया गया प्रकटोत्सव

editor
  • Tapas Vishwas
  • October 26, 2026 02:10 PM
Chants in honor of Maharshi Valmiki echoed through the 'City of Lakes', Nainital! His birth anniversary (Prakatotsav) was celebrated with great fervor, featuring a grand ceremonial procession.

नैनीताल। देवभूमि उत्तराखंड की सुरम्य सरोवर नगरी नैनीताल सोमवार को महर्षि वाल्मीकि के प्रकटोत्सव के अवसर पर पूरी तरह भक्तिमय रंग में रंगी नजर आई। वाल्मीकि मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद निकाली गई भव्य शोभायात्रा ने पूरे शहर को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इस आयोजन में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और अद्भुत झांकियों ने हर किसी का मन मोह लिया, जहाँ हर जुबान पर आदिकवि के जयकारे गूंज रहे थे। शोभायात्रा के दौरान नैनीताल की सड़कों पर आस्था और संस्कृति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। यात्रा में शामिल काली अखाड़ा, शिव अखाड़ा और प्रसिद्ध नासिक बैंड ने अपनी अनूठी और ऊर्जावान प्रस्तुतियों से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। अखाड़ों के कलाकारों द्वारा दिखाए गए करतबों और ढोल-नगाड़ों की गूंज ने पूरे वातावरण को उत्सव में तब्दील कर दिया। सरोवर नगरी की फिजाओं में श्रद्धा का प्रसार करती इस शोभायात्रा में सजी झांकियां मुख्य आकर्षण का केंद्र रहीं। फूलों से सजी भव्य बग्गी पर सवार भारत माता, भगवान गणेश, महाकाल का काली तांडव, महर्षि वाल्मीकि का दिव्य डोला, संकटमोचन हनुमान, आदिकवि महर्षि वाल्मीकि, शक्ति स्वरूपा नौ दुर्गा, मर्यादा पुरुषोत्तम राम दरबार और मनमोहक राधा-कृष्ण की झांकियां ने हर किसी का ध्यान खींचा। इन सजीव झांकियों के दर्शन के लिए मार्ग के दोनों ओर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। शोभायात्रा के दौरान आयोजित सभा में वक्ताओं ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन और उनके महान विचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान वक्ता दिनेश कटियार ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि केवल रामायण के रचयिता ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के मार्गदर्शक हैं। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से आह्वान किया कि वे आदिकवि के जीवन-मूल्यों और संघर्षों से प्रेरणा लेकर उनके बताए मार्ग पर चलें। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित महाकाव्य 'रामायण' भारतीय संस्कृति, सभ्यता और साहित्य की एक अमूल्य धरोहर है, जो सदियों से समाज को नैतिकता और कर्तव्यनिष्ठा का पाठ पढ़ाती आ रही है। इस पावन अवसर पर वाल्मीकि समाज और स्थानीय नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पर्व के उल्लास के बीच सभी ने एकजुट होकर समाज में आपसी प्रेम, भाईचारा और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का दृढ़ संकल्प लिया। उपस्थित लोगों का कहना था कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज को जोड़ने और नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध विरासत से जोड़े रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।


संबंधित आलेख: