चिकन नेक बनेगा 'अजेय': ₹51,000 करोड़ से जमीन के नीचे बिछेगा रेल मार्ग, बिहार के सीमांचल की बदलेगी तकदीर
किशनगंज।भारत की अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा को अभेद्य बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। देश के सबसे संवेदनशील और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 'चिकन नेक' (सिलीगुड़ी गलियारा) को सुरक्षित करने के लिए ₹51,000 करोड़ की अनुमानित लागत से एक विशाल अंडरग्राउंड (भूमिगत) रेल मार्ग की आधारशिला रखी जा चुकी है। कटिहार रेल डिवीजन के तहत बनने वाली यह परियोजना न केवल भारतीय सेना के लॉजिस्टिक्स को अचूक ताकत देगी, बल्कि बिहार के सीमांचल क्षेत्र विशेषकर किशनगंज और आसपास के इलाकों के लिए आर्थिक विकास के नए द्वार खोलेगी। यह पूरी परियोजना भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति, 'भारतमाला' और 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' का एक बेहद अहम हिस्सा है, जिस पर रक्षा विशेषज्ञों से लेकर आम जनता तक की नजरें टिकी हैं। यह बेहद महत्वपूर्ण अंडरग्राउंड रेल मार्ग पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में स्थित कुमेदपुर स्टेशन से शुरू होकर जलपाईगुड़ी जिले के आमबाड़ी फालाकाटा तक जाएगा। यह पूरा मार्ग सिलीगुड़ी और न्यू जलपाईगुड़ी (NJP) क्षेत्र के बेहद करीब से गुजरेगा, जो सीधे तौर पर बिहार के किशनगंज जिले की सीमाओं को स्पर्श करता है। जमीन के नीचे पूरी तरह सुरक्षित रहने वाले इस रेल मार्ग का संचालन कटिहार रेल डिवीजन द्वारा किया जाएगा।
भौगोलिक दृष्टि से 'चिकन नेक' भारत का सबसे नाजुक हिस्सा माना जाता है। कई स्थानों पर इसकी चौड़ाई महज 20 से 25 किलोमीटर ही रह जाती है। यह एकमात्र ऐसा जमीनी रास्ता है जो मुख्य भारत को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों से जोड़ता है। नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और चीन जैसी विदेशी सीमाओं से घिरे होने के कारण यह गलियारा हमेशा भू-राजनीतिक तनाव, सैन्य संकट और प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम पर रहता है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी युद्ध जैसी स्थिति में दुश्मन सबसे पहले इसी पतले रास्ते को ब्लॉक करने की कोशिश कर सकता है, जिससे पूर्वोत्तर का संपर्क देश से कट जाए। "इस खतरे को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए जमीन के नीचे यह वैकल्पिक रेल मार्ग तैयार किया जा रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि किसी भी कीमत पर चिकन नेक को अजेय और सुरक्षित बनाया जाएगा। इस अंडरग्राउंड रेल मार्ग के निर्माण से बिहार, खासकर सीमांचल क्षेत्र, देश के सबसे बड़े रक्षा और व्यापारिक केंद्र के रूप में उभरेगा। किशनगंज और सीमांचल का इलाका पूरी तरह से सुरक्षित रक्षा जोन में तब्दील हो जाएगा। बाढ़ या किसी भी प्राकृतिक आपदा के समय भी पूर्वोत्तर राज्यों के साथ बिहार का व्यापार और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क कभी बाधित नहीं होगा। 4 करोड़ से अधिक लोगों की जीवन रेखा माने जाने वाले इस रूट के आधुनिक होने से बिहार में नए रोजगार और उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। वर्तमान में इस महापरियोजना के लिए भू-तकनीकी अध्ययन और डिजाइनिंग का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। समय सीमा के भीतर काम पूरा करने के लिए सभी जरूरी कागजी प्रक्रियाओं को तेजी से निपटाया जा रहा है। सरकार ने इस अभूतपूर्व अंडरग्राउंड प्रोजेक्ट को साल 2033 तक पूरी तरह चालू करने का लक्ष्य रखा है। स्थानीय जनता, रक्षा विशेषज्ञों और पूर्वोत्तर के नेताओं ने इस दूरदर्शी फैसले का जोरदार स्वागत किया है, जो देश की सीमाओं को हमेशा के लिए सुरक्षित कर देगा।