जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बीच सीजेपी अध्यक्ष अभिजीत दीपके की बिगड़ी तबीयत,टाइफाइड की पुष्टि, कहा-इस्तीफे तक जारी रहेगा आंदोलन
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का विरोध प्रदर्शन लगातार 5वें दिन भी पूरे शबाब पर रहा। युवाओं और छात्रों का गुस्सा केंद्र सरकार के खिलाफ चरम पर है। इसी बीच आंदोलन की अगुवाई कर रहे सीजेपी अध्यक्ष अभिजीत दीपके की तबीयत अचानक बिगड़ गई है। जांच के बाद उनमें टाइफाइड की पुष्टि हुई है।
तबीयत बिगड़ने के बाद दीपके ने एक वीडियो संदेश जारी कर बताया कि पिछले कुछ दिनों से उन्हें अस्वस्थता महसूस हो रही थी। खून की जांच (ब्लड टेस्ट) कराने पर टाइफाइड होने का पता चला है। फिलहाल वे डॉक्टरों की देखरेख में हैं और उनका इलाज जारी है। जारी वीडियो में अभिजीत दीपके ने अपने समर्थकों और प्रशंसकों से चिंता न करने की अपील की है। उन्होंने देश भर में आंदोलन कर रहे युवाओं और छात्रों का आभार व्यक्त करते हुए कहा, "हम जिस शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं, उसी संकल्प के साथ डटे रहे तो जल्द से जल्द शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों पर एक वीडियो संदेश जारी कर फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन समेत कई कड़े फैसलों की घोषणा की थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपके ने सोशल मीडिया (ट्विटर/X) के जरिए पीएम से सवाल पूछा था कि सरकार देश के लाखों युवाओं और छात्रों के भविष्य के बजाय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को प्राथमिकता क्यों दे रही है? पीएम मोदी के बयान पर सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने प्रधानमंत्री के प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा समस्या का असली समाधान नहीं है, बल्कि यह केवल मुख्य मुद्दे से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश है। रांका ने कहा, "देश में पेपर लीक इसलिए नहीं हो रहे हैं कि फास्ट ट्रैक अदालतों की कमी है, बल्कि इसलिए हो रहे हैं क्योंकि शिक्षा मंत्री पूरी तरह अक्षम साबित हुए हैं। वे एक सुरक्षित और फूलप्रूफ परीक्षा प्रणाली तैयार करने में पूरी तरह से नाकाम रहे हैं। सीजेपी प्रवक्ता ने परीक्षा तंत्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज देश का युवा केवल कागजी वादों की नहीं, बल्कि सीधी जवाबदेही की मांग कर रहा है। प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तावित समाधान 'टूटी हुई हड्डी पर बैंड-एड लगाने' जैसा है। पूरी परीक्षा प्रणाली अंदर से जर्जर और खोखली हो चुकी है। उन्होंने कहा कि जब तक सिस्टम की बुनियादी कमियों को दूर नहीं किया जाता, तब तक पेपर लीक की घटनाएं बंद नहीं होंगी। छात्रों को लंबी कानूनी लड़ाइयों का आश्वासन देने के बजाय तुरंत न्याय मिलना चाहिए, जिसकी शुरुआत शिक्षा मंत्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई और उनके इस्तीफे से होनी चाहिए। सीजेपी ने स्पष्ट किया है कि नेतृत्व की अस्वस्थता के बावजूद जंतर-मंतर पर धरना पूरी ताकत से जारी रहेगा।