नंदा की चौकी पुल पहुंचे सीएम धामी: विवादों में घिरी एप्रोच रोड के पुनर्निर्माण का किया औचक निरीक्षण
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार,10 अगस्त को प्रेमनगर स्थित नंदा की चौकी पुल के एप्रोच रोड के पुनर्निर्माण कार्य का स्थलीय निरीक्षण किया। सहसपुर के भाऊवाला में आयोजित महिला संवाद कार्यक्रम से लौटते समय मुख्यमंत्री का काफिला अचानक नंदा की चौकी पुल पर रुका। सीएम धामी ने खुद मौके पर जाकर पुनर्निर्माण कार्य की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और यातायात संचालन की स्थिति का जायजा लिया तथा लोक निर्माण विभाग व संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की।
प्रेमनगर स्थित नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड के क्षतिग्रस्त होने के बाद सरकार की कार्रवाई अब मौके पर भी नजर आने लगी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को सहसपुर के भाऊवाला में आयोजित महिला संवाद एवं सम्मान कार्यक्रम से लौटते समय नंदा की चौकी पुल पहुंचकर एप्रोच रोड के पुनर्निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने मौके पर निर्माण की गुणवत्ता, सुरक्षा इंतजाम और यातायात व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से निर्माण कार्य की प्रगति और तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जानकारी भी ली। नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड 28 जुलाई को भारी बारिश के बाद क्षतिग्रस्त हो गई थी। खास बात यह रही कि पुल का उद्घाटन इसके क्षतिग्रस्त होने से महज 16 दिन पहले हुआ था। करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस पुल की एप्रोच रोड के इतनी कम अवधि में टूटने का मामला सामने आने के बाद निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हुए थे। विपक्ष ने भी इसे मुद्दा बनाते हुए सरकार पर निशाना साधा था। एप्रोच रोड के क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को तत्काल राहत और पुनर्निर्माण कार्य शुरू करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद अधिकारियों और अभियंताओं की टीम ने युद्धस्तर पर काम शुरू किया। सरकार के मुताबिक क्षतिग्रस्त एप्रोच रोड का पुनर्निर्माण करीब 12 घंटे में पूरा कर यातायात व्यवस्था को सामान्य किया गया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने पुनर्निर्माण कार्य में जुटे अधिकारियों, अभियंताओं और कर्मचारियों के त्वरित प्रयासों की सराहना की। हालांकि, इतनी जल्दी क्षतिग्रस्त हुए निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों के बीच मुख्यमंत्री का निरीक्षण अहम माना जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्य में गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड टूटने के बाद सरकार ने मामले की जांच कराई थी। जांच के बाद निर्माणदायी संस्था का लाइसेंस निलंबित किए जाने के साथ ही कुछ अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई। मामले को लेकर प्रदेश में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हुए थे। पुल निर्माण से जुड़ी कंपनी के राजनीतिक संबंधों को लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाए थे। सरकार का कहना है कि निर्माण कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने उन्हें क्षतिग्रस्त हिस्से और किए गए पुनर्निर्माण की जानकारी दी। नंदा की चौकी पुल देहरादून के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है और इसके एप्रोच रोड के क्षतिग्रस्त होने से क्षेत्र में यातायात प्रभावित हुआ था। ऐसे में पुनर्निर्माण के बाद मुख्यमंत्री के निरीक्षण को सरकार की ओर से निर्माण गुणवत्ता और यातायात सुरक्षा पर निगरानी के तौर पर देखा जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच में सामने आए तकनीकी कारणों और जिम्मेदारियों के आधार पर आगे क्या कार्रवाई होती है।