नीति-माणा जनजाति समागम में सीएम धामी का पारंपरिक अंदाज, जनजातीय विकास को बताया सरकार की प्राथमिकता
चमोली। सीमांत जनपद चमोली के बिरही बेड़ू बगड़ में आयोजित तीन दिवसीय नीति-माणा जनजाति समागम सम्मेलन के समापन अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिरकत की। पारंपरिक वेशभूषा में कार्यक्रम स्थल पहुंचे मुख्यमंत्री का जनजातीय समुदाय ने गाजे-बाजे और पारंपरिक ‘पोणा’ नृत्य के साथ भव्य स्वागत किया। पूरे आयोजन में स्थानीय संस्कृति और परंपराओं की छटा देखने को मिली। मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से पीपलकोटी पहुंचे, जहां से वे सड़क मार्ग से बिरही बेड़ू बगड़ स्थित कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे। आयोजन समिति और स्थानीय जनजातीय समाज के लोगों ने पारंपरिक परिधान पहनकर उनका अभिनंदन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री भी पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए, जिससे कार्यक्रम का माहौल और अधिक आत्मीय हो गया।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति, परंपराएं और लोकजीवन विश्व में विशिष्ट पहचान रखते हैं। उन्होंने जनजातीय समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी भावनाओं और आवश्यकताओं को गंभीरता से लेकर ठोस कदम उठा रही है। आयोजन समिति की ओर से मुख्यमंत्री के समक्ष कई प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें शीतकालीन आवास के लिए भूमि का निस्तारण, भोटिया पड़ाव बेड़ू बगड़ की भूमि को जनजातीय हित में संरक्षित करना, गौरा देवी के नाम पर भोटिया पड़ाव में प्रतिमा स्थापना तथा पर्यावरण संरक्षण आधारित पार्क के निर्माण की मांग शामिल रही। मुख्यमंत्री ने इन मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि विभिन्न स्थानों पर भोटिया पड़ाव की भूमि को जनजातीय समुदाय के नाम दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है और इस संबंध में शीघ्र निर्णय लिया जाएगा।