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वेंटिलेटर पर श्री राम अस्पताल की व्यवस्थाएं! स्टाफ नर्स के 'विवादित' व्यवहार से मरीज बेहाल, निजी अस्पताल जाने की देती हैं सलाह

editor
  • Tapas Vishwas
  • April 17, 2026 11:04 AM
Conditions at Shri Ram Hospital Regarding Ventilator Care! Patient in Distress Due to Staff Nurse's 'Controversial' Behavior; She Advises Shifting to a Private Hospital.

अयोध्या। उत्तरप्रदेश सरकार एक ओर जहां स्वास्थ्य सेवाओं को हाई-टेक और सुलभ बनाने के लिए करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं धरातल पर कुछ कर्मचारियों की मनमानी इन प्रयासों पर पानी फेर रही है। ताजा मामला रामनगरी के प्रतिष्ठित 'श्री राम चिकित्सालय' से सामने आया है, जहाँ तैनात स्टाफ नर्स अनामिका यादव अपनी विवादित कार्यशैली और तीमारदारों से दुर्व्यवहार के चलते चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं।

अस्पताल के सूत्रों और स्थानीय लोगों के अनुसार, स्टाफ नर्स अनामिका यादव की ड्यूटी पर समय से न पहुंचने की आदत ने मरीजों की मुसीबत बढ़ा दी है। आरोप है कि जब मरीज या उनके परिजन इलाज के लिए उनसे संपर्क करते हैं, तो वे मदद के बजाय उनसे तीखी नोकझोंक और दुर्व्यवहार करती हैं। सबसे गंभीर आरोप यह है कि सरकारी अस्पताल में तैनात होने के बावजूद वह मरीजों को बेहतर इलाज का झांसा देकर निजी अस्पतालों में जाने की सलाह देती हैं, जो सीधे तौर पर सरकारी व्यवस्था को ठेंगा दिखाने जैसा है। अनामिका यादव का विवादों से पुराना नाता बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, उनके उग्र व्यवहार के चलते थाना रामजन्मभूमि पुलिस द्वारा पूर्व में शांति भंग की धाराओं में उनका चालान भी किया जा चुका है। केवल मरीज ही नहीं, बल्कि अस्पताल का अन्य स्टाफ भी उनके व्यवहार से बेहद असहज रहता है। नाम न छापने की शर्त पर कई सहकर्मियों ने बताया कि अनामिका का डॉक्टरों और अन्य नर्सों से आए दिन झगड़ा होता रहता है, जिससे अस्पताल का कार्य वातावरण प्रभावित हो रहा है। जब सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के लिए 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपना रही है, तो ऐसे में एक विवादित कर्मचारी पर अब तक सख्त कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है। स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए। श्री राम चिकित्सालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में यदि मरीजों को सम्मानजनक और उचित इलाज नहीं मिलेगा, तो सरकारी दावों की पोल खुलना तय है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस 'विवादित' कार्यप्रणाली पर कब लगाम लगाता है।
 


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