• Home
  • News
  • Controversy at a major center of faith: Allegations of multi-crore embezzlement involving Ram Mandir donations and offerings; SIT probe set to reveal crucial secrets!

आस्था के सबसे बड़े केंद्र पर विवाद: राम मंदिर के दान और चढ़ावे में करोड़ों के गबन के आरोप, एसआईटी जांच से खुलेंगे कई अहम राज!

editor
  • Awaaz Desk
  • June 16, 2026 11:06 AM
Controversy at a major center of faith: Allegations of multi-crore embezzlement involving Ram Mandir donations and offerings; SIT probe set to reveal crucial secrets!

नई दिल्ली। अयोध्या का राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। देश-विदेश से आने वाले भक्त यहां श्रद्धा के साथ दान और चढ़ावा अर्पित करते हैं। लेकिन अब इसी चढ़ावे को लेकर सामने आए कथित गबन के आरोपों ने न केवल प्रशासनिक तंत्र बल्कि पूरे देश को झकझोर दिया है। आरोप है कि मंदिर के दानपात्रों में आए करोड़ों रुपये के चढ़ावे में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार अब तक दान राशि की गिनती से जुड़े पांच कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों की निशानदेही पर लगभग तीन करोड़ रुपये नकद, बैंक खातों में संदिग्ध लेन-देन और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज बरामद किए जाने का दावा किया गया है। हालांकि जांच अभी   प्रारंभिक चरण में है और अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है। जून 2026 के पहले सप्ताह में समाजवादी पार्टी के  नेताओं ने आरोप लगाया कि राम मंदिर के दानपात्रों से सात से आठ करोड़ रुपये तक की राशि गायब है। यह आरोप सार्वजनिक होते ही मामला राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया। विपक्षी दलों ने इसे श्रद्धालुओं की आस्था के साथ विश्वासघात बताते हुए न्यायिक जांच की मांग की, जबकि सरकार ने एसआईटी जांच का रास्ता चुना।

क्या केवल कर्मचारी ही जिम्मेदार? ट्रस्ट की चुप्पी पर सवाल
जांच में सबसे बड़ा सवाल यही उभरकर सामने आ रहा है कि क्या गिरफ्तार किए गए कर्मचारी ही इस पूरे खेल के मुख्य किरदार हैं, या फिर इनके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था। सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियां उन लोगों की भूमिका भी खंगाल रही हैं जिनका मंदिर के वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों में प्रभाव रहा है। कुछ नाम चर्चाओं में हैं, लेकिन अभी तक किसी बड़े व्यक्ति की आधिकारिक रूप से संलिप्तता सिद्ध नहीं हुई है। मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू राम मंदिर ट्रस्ट की प्रतिक्रिया को लेकर है। आलोचकों का कहना है कि यदि वास्तव में करोड़ों रुपये की अनियमितता हुई है तो ट्रस्ट की ओर से तत्काल स्पष्ट और विस्तृत जवाब सामने आना चाहिए था। अब तक ट्रस्ट की ओर से सीमित प्रतिक्रिया ही देखने को मिली है, जिससे कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।

2021 के भूमि विवाद की याद, आगे क्या होगा?
राम मंदिर ट्रस्ट इससे पहले वर्ष 2021 में जमीन खरीद को लेकर उठे विवादों के कारण भी चर्चा में आया था। उस समय कुछ राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया था कि मंदिर निर्माण के लिए खरीदी गई जमीन की कीमत कम समय में कई गुना बढ़ाकर दिखाई गई। हालांकि ट्रस्ट ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह वैध बताया था। अब चढ़ावे में कथित गबन के आरोपों ने एक बार फिर पारदर्शिता और जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है। सरकार ने एसआईटी को निर्धारित समय सीमा में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। जांच एजेंसियां बैंक खातों, दान संग्रह व्यवस्था, सीसीटीवी फुटेज और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं। यदि जांच में बड़े नाम सामने आते हैं तो यह मामला केवल एक वित्तीय अनियमितता नहीं बल्कि देश के सबसे चर्चित धार्मिक संस्थानों में से एक की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह करोड़ों रुपये के गबन का मामला कुछ कर्मचारियों तक सीमित है, या फिर जांच की परतें खुलने के साथ कोई बड़ा सच सामने आएगा। इसका जवाब अब एसआईटी की रिपोर्ट और जांच के अंतिम निष्कर्ष ही देंगे।

नेताओं और संतों की प्रतिक्रियाएं, आस्था बनाम पारदर्शिता
भाजपा के वरिष्ठ नेता विनय कटियार ने कहा कि मामले की जांच हो रही है और सत्य सामने आना चाहिए। वहीं राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने स्पष्ट किया कि उनकी जिम्मेदारी केवल निर्माण कार्यों तक सीमित है और वित्तीय मामलों से उनका कोई संबंध नहीं है। दूसरी ओर महंत कमल नयन दास ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि जांच तंत्र ही निष्पक्ष न हो तो  सच्चाई सामने आना कठिन हो जाता है। उनका यह बयान इस पूरे विवाद को और अधिक संवेदनशील बना देता है। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री मनोज कुमार पांडेय ने विपक्ष पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि जांच पूरी होने दीजिए, सच्चाई स्वयं सामने आ जाएगी। यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं है। यह उस विश्वास का प्रश्न है जो करोड़ों श्रद्धालु मंदिर और उसकी व्यवस्था पर करते हैं। किसी भी धार्मिक संस्था की सबसे बड़ी पूंजी जनता का भरोसा होता है। यदि उस भरोसे पर प्रश्नचिह्न लग जाए तो नुकसान केवल आर्थिक नहीं बल्कि नैतिक और सामाजिक भी होता है।


संबंधित आलेख: