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बेटियों का रहा दबदबा: ताने देने वालों को दिया करारा जवाब,टैक्सी चालक की लाडली ने अभावों के बीच रचा इतिहास

editor
  • Tapas Vishwas
  • April 25, 2026 12:04 PM
Daughters Dominate: A Resounding Reply to Mockers—Taxi Driver's Beloved Daughter Makes History Amidst Hardship.

बागेश्वर।उत्तराखंड बोर्ड परीक्षाओं के नतीजों में इस बार बेटियों ने सफलता का परचम लहराया है। लेकिन बागेश्वर की मेधावी छात्रा गीतिका पंत के लिए यह जीत जितनी गौरवमयी है, उतनी ही भावुक भी। इंटरमीडिएट की प्रदेश वरीयता सूची में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने वाली गीतिका को आज अपने दिवंगत दादा की कमी सबसे ज्यादा खल रही है। वह अपनी सफलता की मिठाई तो सबके साथ बांट रही हैं, लेकिन उनके मन में एक ही टीस है—"इस बार टॉपर बनने की खुशी में दादाजी अपने हाथों से मेरा मुंह मीठा नहीं करा सके। गीतिका के लिए यह सफर आसान नहीं था। हाईस्कूल में जब उन्होंने जिला टॉप किया था, तब उनके बीमार दादा केवलानंद पंत ने कांपते हाथों से पोती को मिठाई खिलाई थी और आशीर्वाद दिया था कि वह इससे भी बड़ी उपलब्धि हासिल करे। गीतिका ने दादा का सपना तो पूरा किया, लेकिन अफसोस कि बीते साल 2 अगस्त को उनके दादा का निधन हो गया। गीतिका उनके बेहद करीब थीं; वह पढ़ाई के साथ-साथ बीमार दादा की सेवा, उन्हें खाना खिलाने और देखरेख करने में कोई कसर नहीं छोड़ती थीं।

गीतिका की माता रीता पंत ने बताया कि दादा के निधन से गीतिका बुरी तरह टूट गई थी। सबको डर था कि इसका असर उसकी पढ़ाई पर पड़ेगा, लेकिन गीतिका ने इस दुख को अपनी ताकत बनाया। वह रोज अपने दादा की तस्वीर को प्रणाम कर पढ़ाई शुरू करती थी। शनिवार को जब रिजल्ट आया, तो गीतिका ने सबसे पहले दादा के चित्र के आगे हाथ जोड़े और उन्हें अपनी सफलता समर्पित की। गीतिका की सफलता उन लोगों के लिए भी एक कड़ा जवाब है जो एक साधारण परिवार की क्षमता पर सवाल उठाते थे। गीतिका के पिता टैक्सी चालक हैं, जिसके कारण वह बच्चों को अधिक समय नहीं दे पाते थे। माता रीता पंत ने भावुक होकर बताया कि एक समय था जब लोग ताने देते थे कि "टैक्सी चालक के बच्चे प्राइवेट स्कूल जाकर क्या करेंगे, इन्हें सरकारी स्कूल भेजो।" लेकिन आज गीतिका ने प्रदेश टॉप कर समाज के हर उस सवाल का जवाब दे दिया है। गीतिका कहती हैं, "दादाजी का खुश होना आज बहुत याद आ रहा है। अगर वह आज होते, तो यह मेरे जीवन का सबसे यादगार लम्हा होता।" यह कहानी केवल एक टॉपर की नहीं, बल्कि एक बेटी के संघर्ष, समर्पण और अपने बुजुर्गों के प्रति अगाध प्रेम की मिसाल है। बागेश्वर में पिछली बार गीतिका ने जब हाईस्कूल में जिला टॉप किया था तब उनके बीमार दादा बेहद खुश हुए थे। आंखों से छलकते आंसू और कांपते हाथों से उन्होंने पोती का मुंह मीठा कराया था। पोती को इससे भी बड़ी सफलता हासिल करने का आशीर्वाद भी दिया। पोती ने उनकी इच्छा को पूरा करते हुए प्रदेश टॉप कर दिया लेकिन दादा उनकी इस खुशी को देखने के लिए संसार में नहीं रहे। गीतिका पंत अपने दादा केवलानंद पंत के बेहद करीब थीं। जब वह हाईस्कूल में थीं तो उनके दादा गंभीर रूप से बीमार थे। चलने-फिरने में असमर्थ दादा की उसने बहुत सेवा की। पढ़ाई के साथ-साथ वह अपने दादा को खाना खिलाने, उन्हें भीतर-बाहर लाने-ले जाने में लगी रहती थी। विगत साल दो अगस्त को उनके दादा का देहांत हो गया। गीतिका की माता रीता पंत ने बताया कि गीतिका अपने दादा को बहुत प्यार करती थी। दादा के निधन का असर उसकी पढ़ाई पर पड़ने की आशंका थी। हालांकि उसने मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर इस दुख को शिक्षा पर हावी नहीं होने दिया। दादा के निधन के बाद वह उनकी फोटो के आगे प्रणाम कर पढ़ाई करने लगीं। शनिवार को जब परीक्षा परिणाम घोषित हुआ तो सबसे पहले उसने दादा के चित्र के आगे हाथ जोड़े। बधाई देने आए लोगाें के सामने दादा का जिक्र आने पर भी गीतिका बेहद भावुक दिखीं। गीतिका ने बताया कि पिछली बार टॉप करने पर दादा का खुश होना आज बहुत याद आ रहा है। काश, इस बार भी वह अपने हाथ से मिठाई खिलाकर आशीर्वाद देते तो वह जीवन का सबसे यादगार लम्हा होता। बेटी की सफलता से उत्साहित रीता पंत ने बताया कि गीतिका के पिता टैक्सी चालक होने के कारण बच्चों को अधिक समय नहीं दे पाते थे। उनके व्यवसाय और बच्चों की परवरिश को लेकर भी लोगों के खूब ताने सुनने पड़े हैं। लोगों ने यहां तक कहा था कि तुम्हारे बच्चे प्राइवेट स्कूल जाकर क्या करेंगे, इन्हें तो सरकारी स्कूल भेजो। हालांकि माता-पिता ने बच्चों पर कभी इन बातों का प्रभाव नहीं पढ़ने दिया। आज जब गीतिका ने इंटरमीडिएट टॉप किया है तो मां रीता को वह सारी बातें याद आ गईं। भावुक होते हुए बोलीं बेटी ने आज तक समाज की ओर से पूछे गए सभी सवालों का जवाब दे दिया है।


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