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लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस, राज्यसभा में सामान्य कामकाज

editor
  • Tapas Vishwas
  • March 10, 2026 01:03 PM
Debate on no-confidence motion against Lok Sabha Speaker Om Birla, normal business in Rajya Sabha

संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण का आज दूसरा दिन है। लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा जारी है। राज्यसभा में सामान्य कामकाज जारी. सदन में क्या-क्या हुआ। सरकार पर विपक्ष शासित राज्यों के साथ पक्षपातपूर्ण व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए राज्यसभा में मंगलवार को विपक्षी दलों के सदस्यों ने दावा किया कि सहकारी संघवाद कहने के साथ साथ उस पर अमल भी करना चाहिए।  ग्रामीण मंत्रालय के कामकाज पर उच्च सदन में हो रही चर्चा में भाग ले रहे तृणमूल कांग्रेस के मोहम्मद नदीमुल हक ने कहा कि सरकार की कथनी और करनी में बहुत अंतर है। उन्होंने कहा कि बढ़-चढ़ा कर आंकड़े पेश करने के बजाय सरकार को असलियत बताना चाहिए। 

हक ने कहा कि यहां ग्रामीण मजदूर और गरीब लोगों की बात हो रही है और लोग बंगाल में बहुत परेशान हैं क्योंकि उनके नाम मतदाता सूचियों से हटाए जा रहे हैं और उनके हक के लिए राज्य की मुख्यमंत्री सड़कों पर धरने पर बैठी हैं। उन्होंने कहा कि मनरेगा में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले बंगाल को आज कई परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। राज्य को उसका बकाया अब तक नहीं मिला है। अदालतों के आदेशों के बावजूद यह स्थिति है। क्या सरकार अदालत के आदेशों की अवमानना कर रही है?’राज्य के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए हक ने कहा कि मनरेगा से राष्ट्रपिता का नाम ही हटा दिया गया।  ‘‘बापू को कौन सम्मान नहीं देता? वह सबके आदरणीय हैं। फिर भी उनके नाम से परहेज क्यों ? उन्होंने कहा ‘‘आप रोजगार तो दे नहीं सकते, लेकिन नियम ऐसे बना देते हैं कि लोग वैसे ही परेशान हो जाते हैं। आधार आधारित भुगतान की व्यवस्था का नियम ऐसा ही एक नियम है।  हक ने दावा किया कि विभिन्न मदों में राज्य का बकाया उसे अब तक नहीं मिल पाया है जबकि राज्य का प्रदर्शन बेहतर रहा है। तृणमूल सदस्य ने कहा कि किसान इसी देश का हिस्सा हैं और उन्हें भी अपनी समस्याओं का समाधान चाहिए। उनकी समस्याएं आज भी वहीं हैं। न आमदनी बढ़ी न कर्ज माफ हुआ और न ही न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी मिली। चर्चा में हिस्सा ले रहीं बीजू जनता दल की सुलता देव ने कहा कि ओडिशा एक आदिवासी बहुल राज्य है और वहां की समस्याएं केंद्र के सामने बार बार उठाने के बाद भी हल नहीं होतीं। फिर आप कैसे ग्रामीण विकास की बात करते हैं। आज आदिवासियों से उनके हक छीने जा रहे हैं। उनके लिए अनाज कहां है?

सुलता ने कहा कि मनरेगा का नाम बदल कर सरकार क्या बताना चाहती है? ‘‘आपने तो उसमें पर्याप्त आवंटन ही नहीं दिया। आप तो 100 दिन का भी काम नहीं दे पा रहे थे फिर नयी योजना में 125 दिन का काम कैसे देंगे ?’’ उन्होंने सरकार पर आदिवासियों को जमीन का पट्टा देना बंद करने और आदिवासी छात्रों की छात्रवृत्ति बंद करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि आज भी ओडिशा के 137 गांव में इंटरनेट की सुविधा नहीं है ‘‘फिर आप कैसे ग्रामीण विकास की बात करते हैं। गांवों में गरीबी को देखते हुए सरकार कम से कम एक माह के लिए ‘‘इनकमिंग फ्री’’ सुविधा देना चाहिए। राजद के संजय यादव ने कहा कि किसान अब चाहते हैं कि उनके बेटे खेती न करें बल्कि अच्छी नौकरी तलाशें। ‘‘क्या वे खेती से विमुख नहीं हो रहे हैं? इसका कारण क्या है ?’’ उन्होंने दावा किया कि बिहार के एक लाख करोड़ से अधिक लोगों के पास मकान नहीं हैं और कई लोगों के लिए पक्का मकान केवल सपना है। बिहार में पलायन दर अधिक होने का दावा करते हुए यादव ने कहा कि राज्य की समस्याओं के कारण लंबे समय से उसे विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की जा रही है पर इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। चर्चा में वाईआरएस कांग्रेस पार्टी के गोल्ला बाबू राव, अन्नाद्रमुक के डॉ एम थंबीदुरै, डॉ एम धनपाल, मनोनीत सदस्य सुधा मूर्ति, बीआरएस के रविचंद्र वद्दिराजू, माकपा के डॉ जॉन ब्रिटास, समाजवादी पार्टी के रामजी लाल सुमन, राकांपा (शप) की डॉ फौजिया खान, भाजपा के सुरेंद्र सिंह नागर, के लक्ष्मण, राम भाई मोकारिया, तेदेपा के मस्तान राव यादव बीधा ने भी हिस्सा लिया। 
 


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