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पश्चिम एशिया में गहराता युद्ध: भारत ने कसी कमर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति गठित

editor
  • Tapas Vishwas
  • March 27, 2026 12:03 PM
Deepening Conflict in West Asia: India Braces Itself; High-Level Committee Constituted Under the Chairmanship of Defence Minister Rajnath Singh

नई दिल्ली।  ईरान और इस्राइल के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के मद्देनजर भारत सरकार ने अपनी रणनीतिक तैयारी तेज कर दी है। युद्ध के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय 'इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप' (अंतर-मंत्रालयी समूह) का गठन किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों पर गठित इस शक्तिशाली समिति में देश के शीर्ष रणनीतिक और आर्थिक चेहरे शामिल हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई वाले इस समूह में गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ अन्य संबंधित मंत्रालयों के मंत्री सदस्य बनाए गए हैं। यह समूह नियमित रूप से बैठकें कर युद्ध से पैदा होने वाली हर छोटी-बड़ी चुनौती का बारीकी से आकलन कर रहा है। संसद में पश्चिम एशिया संकट पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को आश्वस्त किया कि सरकार हर परिस्थिति पर नजर रखे हुए है। पीएम मोदी ने कहा, "यह इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप हमारे आयात-निर्यात में आने वाली हर बाधा का विश्लेषण कर रहा है और आवश्यक समाधानों पर निरंतर काम कर रहा है।" प्रधानमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि कोरोना काल की तर्ज पर विशेषज्ञों और अधिकारियों के सात नए विशेष समूहों का भी गठन किया गया है। ये समूह सप्लाई चेन, पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता, उर्वरक, गैस की आपूर्ति और महंगाई जैसे संवेदनशील विषयों पर त्वरित व दूरगामी रणनीति के तहत कार्य करेंगे। प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि इन साझा प्रयासों से भारत किसी भी वैश्विक संकट का डटकर सामना कर पाएगा। पश्चिम एशिया के युद्धक्षेत्र की बात करें तो शांति की उम्मीदें फिलहाल धुंधली नजर आ रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के साथ शांति वार्ता की पहल के बावजूद संघर्ष और तेज हो गया है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह फिलहाल किसी भी देश की मध्यस्थता स्वीकार करने को तैयार नहीं है। दूसरी ओर, इस्राइली रक्षा बलों ने ईरान के 'यज्द' स्थित मिसाइल और समुद्री खदान उत्पादन के मुख्य केंद्र को निशाना बनाकर भारी तबाही मचाई है। इस्राइल का दावा है कि यह केंद्र क्रूज मिसाइलों और उन्नत समुद्री हथियारों के भंडारण व विकास का मुख्य अड्डा था। पश्चिम एशिया में अशांति से भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतों और खाद की उपलब्धता पर सीधा असर पड़ सकता है। सरकार की इस मुस्तैदी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध की आंच भारतीय आम जनता की जेब और देश की खाद्य सुरक्षा तक न पहुँचे।
 


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