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दिल्ली हाईकोर्ट के जामिया मिल्लिया इस्लामिया को दो टूक निर्देश-आप अपनी संपत्ति बेचे और शिक्षक के वेतन का भुगतान करें,सबको देने के लिए है पैसे है गरीब शिक्षक के लिए नहीं?

editor
  • Kanchan Verma
  • July 10, 2022 07:07 AM
Delhi High Court's instructions to Jamia Millia Islamia bluntly - you sell your property and pay the teacher's salary, there is money to give to everyone, not for the poor teacher?

जामिया मिल्लिया इस्लामिया को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका लगा है। हाईकोर्ट ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया की उस याचिका को खारिज किया है जिसमे यूजीसी को सरोजिनी नायडू महिला अध्ययन केंद्र के लिए उससे धन जारी करने के निर्देश देने की मांग की थी। कोर्ट ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया को लताड़ते हुए कहा कि आप यूजीसी से धन प्राप्त करने के लिए अदालत को ढाल नही बना सकते।
मामले के मुताबिक सरोजनी नायडू महिला अध्ययन केंद्र के निदेशक के रूप में कार्यरत एक प्रोफेसर द्वारा अपने वेतन के भुगतान की मांग करने वाली एक लंबित याचिका के संबंध में जामिया की ओर से दायर आवेदन पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने मौखिक आदेश पारित किया। जामिया ने यह कहते हुए आवेदन दाखिल किया था कि यूजीसी द्वारा नियमित बजट या भारतीय विश्वविद्यालयों में महिला अध्ययन के विकास की योजना के तहत सहायता नहीं देने के कारण प्रोफ़ेसर के वेतन का भुगतान नहीं किया जा सकता है। विश्वविद्यालय ने हाईकोर्ट से यह भी अपील की थी कि वह आयोग को अनुदान जारी करने और योजना के तहत 6 करोड़ की बकाया राशि का भुगतान करने का निर्देश दें। मामले में हाईकोर्ट ने सवाल किया कि जब विश्वविद्यालय के कुलपति और रजिस्ट्रार सहित अन्य सभी अधिकारियों को वेतन मिल रहा है तो संबंधित शिक्षक को क्यों नहीं दिया जा रहा? कोर्ट ने यह भी कहा कि आप अपनी संपत्ति बेचे और पैसे का भुगतान करें। यूजीसी से पैसे लेने के लिए आप अदालत को ढाल नहीं बना सकते। अपने कुलपति और रजिस्ट्रार से कहें कि वह अपना वेतन रोक दें और संबंधित शिक्षक को भुगतान करें।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सतीश चंद शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच में हुई।बेंच ने कहा कि अन्य सभी अधिकारियों को वेतन देने के लिए आपके पास पैसा है, लेकिन संबंधित शिक्षक के लिए आप चाहते हैं कि हम यूजीसी को निर्देश दे। कुलपति और रजिस्ट्रार को वेतन मिल रहा है, लेकिन गरीब शिक्षक को नहीं ।
उधर जामिया के वकील सतीश सभरवाल ने कोर्ट में यह दलील दी थी कि यह केंद्र यूजीसी का है और विश्वविद्यालय इसे यूजीसी की योजना के तहत चला रहा है उन्होंने यह भी कहा कि यूजीसी ने विश्वविद्यालय को केंद्र के विलय के लिए पत्र भेजा था ना कि शिक्षण पदों के लिए शिक्षकों के वेतन के लिए। धन यूजीसी से ही आना है जिसने अनुदान जारी करना बंद कर दिया है। उधर बेंच ने सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय से कहा कि विश्वविद्यालय ने पिछली सुनवाई में यह कहा था कि प्रोफेसर को सभी बकाया राशि का भुगतान करेगा। बेंच ने कहा कि अदालत ने जामिया का आश्वासन स्वीकार कर लिया है। प्रोफेसर को मासिक आधार पर तय समय पर वेतन का भुगतान जारी रहेगा।
आपको बता दें कि 6 जुलाई को भी सुनवाई के दौरान अदालत द्वारा पूछे गए एक विशेष सवाल पर कि क्या कुलपति रजिस्ट्रार और अन्य शिक्षकों को वेतन मिल रहा है इस पर विश्वविद्यालय के वकील ने हां में जवाब दिया था। जिसके बाद हाईकोर्ट ने याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह आवेदन कुछ और नहीं बल्कि पिछले आदेश को दरकिनार करने का प्रयास है जो एक सहमति आदेश था हमें आवेदन पर विचार करने की कोई वजह नजर नहीं आती है लिहाजा इसे खारिज किया जाता है


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