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ब्रिटिश काल से आयोजित हो रहे भीमताल हरेला मेले को राजकीय दर्जा देने की मांग, बोले अखिलेश सेमवाल, पर्यटन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

editor
  • Kanchan Verma
  • July 17, 2026 06:07 AM
Demand for state status for Bhimtal Harela fair, which has been organised since the British period, Akhilesh Semwal said tourism will get a big boost.

भीमताल। भीमताल में ब्रिटिश काल से आयोजित हो रहे ऐतिहासिक हरेला मेले को राजकीय मेले का दर्जा दिए जाने की मांग उठी है। भारतीय जनता पार्टी के पर्यटन गतिविधि प्रकोष्ठ, जिला नैनीताल के जिला संयोजक अखिलेश सेमवाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस संबंध में पहल करने का आग्रह किया है।
अखिलेश सेमवाल ने जारी बयान में कहा कि हरेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पारंपरिक विरासत और प्रकृति संरक्षण की भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भीमताल का हरेला मेला वर्षों से क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बना हुआ है और इसका इतिहास ब्रिटिश काल तक जाता है। हर वर्ष स्थानीय लोगों के साथ-साथ प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक इस मेले में शामिल होने पहुंचते हैं।
उन्होंने कहा कि यह मेला धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था का भी महत्वपूर्ण आधार है। मेले के दौरान व्यापारियों, होटल एवं रेस्टोरेंट संचालकों, हस्तशिल्प से जुड़े कारीगरों और छोटे कारोबारियों को रोजगार और व्यापार के बेहतर अवसर मिलते हैं।
अखिलेश सेमवाल का कहना है कि यदि भीमताल के हरेला मेले को राजकीय मेले का दर्जा मिलता है तो इसके आयोजन का दायरा और भव्यता दोनों बढ़ेंगे। साथ ही भीमताल को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी और क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अपील की कि प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस ऐतिहासिक मेले को राजकीय मेला घोषित किया जाए। उनका कहना है कि इससे उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं को नई पहचान मिलेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।


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