देवघर महिला फुटबॉल सेंटर विवाद: खेल अधिकारी और क्लर्क पर प्रताड़ना का आरोप,सीएम के संज्ञान के बाद डीडीसी ने सुनीं खिलाड़ियों की दर्दभरी दास्तां
देवघर। झारखंड के देवघर स्थित डे-बोर्डिंग महिला फुटबॉल सेंटर की उदीयमान महिला खिलाड़ियों पर मंडरा रहे उत्पीड़न के बादलों के बीच जिला प्रशासन अब एक्शन मोड में आ गया है। जिला खेल पदाधिकारी संतोष कुमार और उनके क्लर्क पर महिला फुटबॉलरों द्वारा लगाए गए प्रताड़ना व संसाधनों से वंचित करने के गंभीर आरोपों के बाद मामला गरमा गया है। मुख्यमंत्री तक शिकायत पहुँचने और जांच के कड़े निर्देश मिलने के बाद उप विकास आयुक्त पीयूष कुमार सिन्हा ने खुद कमान संभालते हुए पीड़ित खिलाड़ियों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं।
देवघर के डे-बोर्डिंग महिला फुटबॉल सेंटर की खिलाड़ियों ने अपने ही जिले के खेल अधिकारी और उनके क्लर्क पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री तथा राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई थी। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल निष्पक्ष जांच के आदेश जारी किए गए। निर्देश मिलते ही देवघर के उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया ने डीडीसी पीयूष कुमार सिन्हा को इस संवेदनशील मामले की जांच सौंप दी। सोमवार को डीडीसी ने शिकायतकर्ता खिलाड़ियों को बुलाकर उनके बयान दर्ज किए। डीडीसी पीयूष कुमार सिन्हा ने बताया कि उपायुक्त के निर्देशानुसार पूरी निष्पक्षता से जांच की जा रही है और जल्द ही विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंप दी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तय होगी। पीड़ित महिला खिलाड़ियों का आरोप है कि जिला खेल पदाधिकारी संतोष कुमार और उनके लिपिक (क्लर्क) न केवल उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं, बल्कि अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए उपलब्ध सरकारी खेल संसाधनों के इस्तेमाल में भी तरह-तरह की बाधाएं पैदा करते हैं। खिलाड़ियों ने अपने बयान में बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि जब भी वे अभ्यास या अपनी ट्रेनिंग के लिए नियमानुसार सरकारी सुविधाओं की मांग करती हैं, तो उन्हें सहयोग देने के बजाय संस्थान (सेंटर) से बाहर का रास्ता दिखाने और खेल करियर बर्बाद करने की धमकियां दी जाती हैं। लगातार हो रही इस प्रताड़ना से तंग आकर आखिरकार महिला खिलाड़ियों को शासन के शीर्ष नेतृत्व का दरवाजा खटखटाना पड़ा। यह पूरा प्रकरण अब सिर्फ देवघर तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि मुख्यमंत्री स्तर तक मामला पहुँचने के बाद पूरे झारखंड के खेल गलियारों में हड़कंप मच गया है। महिला खिलाड़ियों के सुरक्षा, सम्मान और खेल सुविधाओं से जुड़ा मामला होने के कारण खेल प्रेमी और विभिन्न खेल संगठन भी दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। फिलहाल, मामले की जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद ही सच्चाई से पूरी तरह पर्दा उठ पाएगा। हालांकि, जिला प्रशासन के सक्रिय रुख से पीड़ित महिला फुटबॉलरों को जल्द से जल्द न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।