धामी कैबिनेट की महाबैठक आज: आपदा प्रबंधन, ईवी पॉलिसी और ट्रांसफर एक्ट पर लग सकती है मुहर
देहरादून। उत्तराखंड में भारी बारिश के अलर्ट और चारधाम यात्रा के संवेदनशील दौर के बीच आज यानी शुक्रवार, 10 जुलाई को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। सचिवालय के मुख्य भवन में दोपहर 4:25 बजे से शुरू होने वाली यह बैठक कई मायनों में खास है। जुलाई महीने की इस पहली कैबिनेट बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन, ऊर्जा, खेल और लोक निर्माण विभाग समेत तमाम अन्य विभागों से संबंधित कई बड़े नीतिगत फैसलों और प्रस्तावों पर मुहर लगने की पूरी संभावना है।
पहले यह तय हुआ था कि मंत्रिमंडल की यह महत्वपूर्ण बैठक सुबह 9:00 बजे आयोजित की जाएगी। लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अचानक लगे दिल्ली दौरे के कारण इसके समय में आंशिक बदलाव करना पड़ा। अब मुख्यमंत्री के देहरादून लौटते ही दोपहर 4:25 बजे से सचिवालय में मंत्रियों और आला अधिकारियों का जमावड़ा लगेगा। चूंकि इस समय प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी है, वहीं दूसरी तरफ लाखों की संख्या में श्रद्धालु चारधाम यात्रा पर हैं। ऐसे में इस बैठक का सबसे बड़ा एजेंडा आपदा प्रबंधन विभाग रहने वाला है। सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान मानसून जनित आपदाओं से निपटने, संवेदनशील मार्गों को खोलने के लिए बजट आवंटन और चारधाम यात्रियों की सुरक्षा व ठहरने के पुख्ता इंतजामों को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी मिल सकती है। प्रदेश में पर्यावरण अनुकूल वाहनों को बढ़ावा देने और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी पर मुहर लग सकती है। शिक्षा विभाग के तहत शिक्षकों के ट्रांसफर में पारदर्शिता लाने और नियमों को और अधिक सुगम बनाने संबंधी बेहद खास प्रस्ताव कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। नियोजन विभाग की ओर से राज्य के विकास को गति देने के लिए तैयार की गई तमाम नई नीतियों को मंजूरी दी जा सकती है। स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, दूरस्थ क्षेत्रों में डॉक्टरों की तैनाती और ऊर्जा विभाग के तहत बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ करने से जुड़े प्रस्तावों पर भी मुहर लगने की उम्मीद है। वही नारायण दत्त तिवारी का रिकॉर्ड तोड़कर राज्य के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री बने पुष्कर सिंह धामी की इस कैबिनेट बैठक से जनता को काफी उम्मीदें हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक में लिए जाने वाले फैसले न सिर्फ मानसून के संकट से निपटने में मददगार साबित होंगे, बल्कि राज्य में सुशासन, पारदर्शिता और ढांचागत विकास को एक नई रफ्तार देंगे।