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भोजपुर में काल बनी जर्जर दीवार: मलबे में दबकर दो मासूम चचेरे भाइयों की दर्दनाक मौत, इकलौते चिराग की मौत से पसरा मातम

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 18, 2026 02:07 PM
Dilapidated wall turns deadly in Bhojpur: Two young cousins ​​die a tragic death after being buried under the debris; mourning prevails following the death of the family's only son.

बिहार के भोजपुर जिले के बिहिया नगर परिषद क्षेत्र से एक बेहद ही दर्दनाक और झकझोर देने वाला हादसा सामने आया है। यहाँ एक जर्जर और पुरानी बाउंड्री वॉल (दीवार) अचानक भरभराकर गिर गई, जिसकी चपेट में आने से दो सगे चचेरे भाइयों की मलबे में दबकर मौत हो गई। मृतकों की पहचान वार्ड नंबर 6 निवासी तीन वर्षीय शिवांश कुमार उर्फ कल्लू और ढाई वर्षीय अंकित कुमार के रूप में हुई है। इस भयावह हादसे में बच्चों को बचाने की कोशिश में उनके दादा भी गंभीर रूप से जख्मी हो गए हैं। दो मासूमों की असमय मौत के बाद से पूरे इलाके में कोहराम मच गया है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

जानकारी के अनुसार, यह हृदयविदारक घटना बिहिया के धोबिया मोहल्ला (नगर परिषद वार्ड संख्या 6) में घटित हुई। शनिवार को दोनों मासूम बच्चे अपने घर के बाहर आंगन के समीप खेल रहे थे। इसी दौरान पड़ोस की एक अत्यंत पुरानी और कमजोर हो चुकी बाउंड्री वॉल अचानक जोरदार आवाज के साथ जमींदोज हो गई। खेल रहे दोनों बच्चे संभल भी नहीं पाए और भारी-भरकम मलबे के नीचे पूरी तरह दब गए। पास ही मौजूद उनके दादा छोटक रजक ने जब दीवार को गिरते देखा, तो वे बच्चों को बचाने के लिए दौड़े, लेकिन वे भी मलबे की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के संबंध में मृतक बच्चों के बड़े पापा राजू कुमार रजक ने बताया कि अचानक दीवार गिरने की जोरदार आवाज और चीख-पुकार सुनकर आसपास के स्थानीय लोग बड़ी संख्या में मौके पर दौड़े। ग्रामीणों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए तुरंत मलबा हटाना शुरू किया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। तीन साल के मासूम शिवांश कुमार उर्फ कल्लू की मौके पर ही सांसें थम चुकी थीं। वहीं, दूसरे बच्चे ढाई साल के अंकित कुमार को बेहद नाजुक हालत में मलबे से निकालकर तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उसने भी दम तोड़ दिया। इस घटना ने दो हंसते-खेलते पिताओं की गोद सूनी कर दी। शिवांश अपने चार भाइयों में तीसरे नंबर पर था, जबकि अंकित अपने माता-पिता का इकलौता बेटा और घर का कुलदीपक था। इकलौते बेटे की मौत से मां बदहवास हो चुकी है। इस दर्दनाक हादसे के बाद ग्रामीणों और पीड़ित परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने बच्चों के शवों को बिहिया-जगदीशपुर स्टेट हाईवे-102 पर रखकर सड़क को पूरी तरह जाम कर दिया। प्रदर्शनकारी जर्जर मकान के मालिक पर कानूनी कार्रवाई करने और पीड़ित परिवार के लिए उचित सरकारी मुआवजे की मांग कर रहे थे। हाईवे जाम होने के कारण सड़क के दोनों ओर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं। सूचना मिलते ही बिहिया थाने की पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और काफी समझाने-बुझाने के बाद जाम को खुलवाया। पुलिस ने दोनों मासूमों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए आरा सदर अस्पताल भेज दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अंचल अधिकारी (सीओ) निलेश कुमार ने बताया कि घटना की पूरी जानकारी भोजपुर के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) को दे दी गई है। उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार मामले में त्वरित और उचित कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आपदा राहत कोष के तहत पीड़ित परिवारों को उचित सरकारी मुआवजा देने की कागजी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जल्द ही सहायता राशि प्रदान की जाएगी। दो मासूम बच्चों की एक साथ हुई इस दुखद मौत से पूरे गांव में चूल्हा तक नहीं जला है। हर आंख नम है और गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाने के लिए पीड़ितों के घर पर ग्रामीणों और रिश्तेदारों का तांता लगा हुआ है। घटना की जानकारी मिलते ही कई स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नेताओं ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की और इस बेहद कठिन समय में हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि शहर में मौजूद अन्य सभी जर्जर ढांचों को चिह्नित कर जल्द गिराया जाए ताकि भविष्य में ऐसा कोई और हादसा न हो।


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