नैनीताल के फ्रूट बेल्ट में फसलों पर बीमारी का कहर! उद्यान विभाग की दवा पर उठे सवाल
नैनीताल। नैनीताल जिले के प्रसिद्ध फ्रूट बेल्ट क्षेत्र रामगढ़, मुक्तेश्वर, नाथुवाखान, हरतोला और आसपास के इलाकों में फल उत्पादक काश्तकार इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। क्षेत्र के किसानों ने उद्यान विभाग पर आरोप लगाते हुए कहा है कि विभाग द्वारा फलों के पेड़ों में रोग नियंत्रण के लिए जो दवा उपलब्ध कराई गई थी, उसके छिड़काव के बावजूद फलों के पेड़ों में तेजी से बीमारी फैल रही है। इससे बागवानी और मल्टीकल्चर फसलों को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका गहरा गई है। किसानों का कहना है कि दवा छिड़काव के बावजूद पेड़ों पर फंगल संक्रमण तेजी से फैल रहा है। कई जगह पौधों की ग्रोथ रुक गई है, पत्तियां सूखने लगी हैं और फलदार पेड़ों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। इससे क्षेत्र के बागवानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि यह उनकी सालभर की मेहनत और आय का मुख्य स्रोत है। काश्तकारों का आरोप है कि यदि समय रहते बीमारी पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो इस बार पूरी फसल चौपट हो सकती है। उन्होंने बताया कि वर्तमान स्थिति में यदि बाजार भाव अच्छा मिलता है तो किसी तरह नुकसान की भरपाई संभव हो सकती है, लेकिन यदि बाजार में उचित मूल्य नहीं मिला तो उनकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह डगमगा जाएगी। स्थानीय किसानों का कहना है कि वे मजबूरी में अपने स्तर पर दवाइयों और अन्य संसाधनों के जरिए फसल बचाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ सलाह और सरकारी सहयोग के अभाव में बीमारी पर नियंत्रण मुश्किल होता जा रहा है। हरतोला क्षेत्र के काश्तकारों ने बताया कि फल उत्पादन ही यहां के अधिकांश परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन है। यदि इसी तरह बीमारी बढ़ती रही और फसल खराब हो गई तो लोगों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। इससे क्षेत्र में पलायन जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है। किसानों ने बताया कि उन्होंने मामले की सूचना कृषि विभाग, उद्यान विभाग और संबंधित अधिकारियों को दे दी है, लेकिन शिकायत के बावजूद अभी तक कोई भी अधिकारी मौके पर निरीक्षण के लिए नहीं पहुंचा। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी न तो बीमारी के कारणों की सही जानकारी दे रहे हैं और न ही यह बताया जा रहा है कि संक्रमण को रोकने के लिए कौन.सी प्रभावी दवा या तकनीक अपनाई जाए। स्थानीय ग्रामीण सुशील कुमार ने कहा कि किसानों ने समय पर विभाग द्वारा दी गई दवा का छिड़काव किया, लेकिन इसके बावजूद रोग फैलना गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो इस बार किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। वहीं हरतोला के काश्तकारों ने आरोप लगाया कि उद्यान विभाग किसानों को भरोसेमंद दवा और तकनीकी सहायता देने में विफल साबित हो रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जब इसकी सूचना जिलाधिकारी तक पहुंची तो उन्होंने तत्काल उद्यान विभाग के दवा विशेषज्ञों को मौके की जांच कर दवाओं का परीक्षण करने के निर्देश दिए।