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एसआईआर नोटिस से घबराएं नहीं! आपदा में दस्तावेज नष्ट होने पर भी मिलेगा समाधान! खुद उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भी मिला नोटिस

editor
  • Tapas Vishwas
  • August 07, 2026 11:08 AM
Don't panic over the SIR notice! A solution is available even if documents were destroyed during the disaster. Uttarakhand's Chief Electoral Officer himself also received a notice.

देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान लाखों मतदाताओं को जारी किए जा रहे नोटिसों के बीच मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) डॉ. बीवीआरसी. पुरुषोत्तम ने बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति के दस्तावेज प्राकृतिक आपदा में नष्ट हो गए हैं, तो ऐसे लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। निर्वाचन विभाग ने ऐसे मामलों के समाधान के लिए विशेष व्यवस्था की है। खास बात यह है कि स्वयं मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भी नाम में विसंगति के कारण एसआईआर नोटिस मिला है। डॉ. पुरुषोत्तम ने बताया कि उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण हर वर्ष मानसून के दौरान कई क्षेत्रों में बाढ़, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाएं आती हैं। वर्ष 2025 की भीषण आपदा में भी अनेक लोगों के घर क्षतिग्रस्त हो गए थे और उनके महत्वपूर्ण दस्तावेज नष्ट हो गए थे। ऐसे में एसआईआर अभियान के दौरान दस्तावेज उपलब्ध न होना स्वाभाविक चुनौती है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में मतदाताओं को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, यदि किसी मतदाता के दस्तावेज आपदा में बह गए हैं या क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, तो संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी स्थानीय बूथ लेवल अधिकारी की रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामले का निस्तारण करेंगे। ईआरओ केवल इस बात से संतुष्ट होंगे कि संबंधित व्यक्ति भारत का नागरिक है और मतदाता बनने की पात्रता रखता है। इससे आपदा प्रभावित लोगों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि मतदाता सूची के शुद्धिकरण के तहत प्रदेश में 19.04 लाख मतदाताओं को विभिन्न प्रकार की विसंगतियों के कारण नोटिस जारी किए गए हैं और उनमें उनका अपना नाम भी शामिल है। उन्होंने कहा कि यदि किसी मतदाता को नोटिस मिला है तो उसे किसी भ्रम में आने की बजाय निर्धारित समय पर आवश्यक दस्तावेज या स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना चाहिए, ताकि मतदाता सूची को अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनाया जा सके। एसआईआर प्रक्रिया के नियमों की जानकारी देते हुए डॉ. पुरुषोत्तम ने बताया कि एक सामान्य नागरिक अधिकतम पांच मतदाताओं के नाम पर आपत्ति दर्ज करा सकता है, जबकि मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बीएलए-2 प्रतिदिन अधिकतम 10 मतदाताओं के संबंध में आपत्ति दर्ज कर सकते हैं। सभी आपत्तियों और दावों का निस्तारण निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं के लिए निर्वाचन विभाग ने विशेष व्यवस्था भी लागू की है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि सभी जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि 65 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग मतदाताओं के मामलों में अधिकारी स्वयं उनके घर जाकर नोटिसों की सुनवाई करें। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऐसे मतदाताओं को केवल नोटिस के जवाब के लिए बूथों या कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। वर्तमान प्रगति की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि एसआईआर के नोटिस चरण में 24.30 लाख नोटिसों के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 20.27 लाख नोटिस मतदाताओं तक पहुंचाए जा चुके हैं। वहीं, 14 जुलाई से 5 अगस्त के बीच दावा और आपत्ति चरण में फॉर्म-6 के 57 हजार, फॉर्म-7 के 22,668 तथा फॉर्म-8 के 26,145 आवेदन प्राप्त हुए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि एसआईआर अभियान को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए राजनीतिक दलों से भी लगातार सुझाव लिए जा रहे हैं। विधानसभा स्तर पर ईआरओ, जिला स्तर पर डीईओ और राज्य स्तर पर सीईओ नियमित बैठकें कर अभियान की समीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने सभी मतदाताओं से अपील की कि यदि उन्हें नोटिस मिला है तो घबराने के बजाय समय पर उसका जवाब दें, ताकि मतदाता सूची का शुद्धिकरण सुचारु रूप से पूरा हो सके।


 


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