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पत्रकारिता और साहित्य के पुरोधा डॉ. गिरीश रंजन तिवारी को 'उत्तराखंड गौरव सम्मान', केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और सीएम धामी ने किया अलंकृत

editor
  • Tapas Vishwas
  • November 06, 2026 12:11 PM
Dr. Girish Ranjan Tiwari, a stalwart of journalism and literature, honored with the 'Uttarakhand Gaurav Samman' by Union Home Minister Amit Shah and CM Dhami.

उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एक भव्य और गरिमामयी समारोह में सरोवर नगरी नैनीताल और कुमाऊं क्षेत्र का मस्तक गर्व से ऊंचा हो गया है। वरिष्ठ पत्रकार, प्रतिष्ठित लेखक और कुमाऊं विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. गिरीश रंजन तिवारी को राज्य के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'उत्तराखंड गौरव सम्मान' से अलंकृत किया गया है। राजधानी देहरादून में आयोजित इस मुख्य समारोह में देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संयुक्त रूप से उन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया।

पत्रकारिता की कलम, साहित्य की साधना और शिक्षा के क्षेत्र में वर्षों के समर्पण को आखिरकार एक और बड़ी पहचान मिली है। नैनीताल के वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं कुमाऊं विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. गिरीश रंजन तिवारी को उत्तराखंड गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया है। राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया। पत्रकारिता, हिंदी साहित्य, लेखन और शिक्षण के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए उन्हें राज्य के इस सर्वोच्च सम्मान के लिए चुना गया। उनकी इस उपलब्धि से नैनीताल सहित पूरे कुमाऊं क्षेत्र में खुशी और गौरव का माहौल है। डॉ. गिरीश रंजन तिवारी ने अपने लंबे शैक्षणिक और साहित्यिक सफर में पत्रकारिता को केवल समाचारों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उत्तराखंड के इतिहास, संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत को भी अपने लेखन के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया है। उनके लेखन में पहाड़ की सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को विशेष स्थान मिला है। उनकी उपलब्धियों की कड़ी में हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग की ओर से प्रदान किया गया राजभाषा गौरव सम्मान भी शामिल है। उन्हें यह पुरस्कार उनकी चर्चित पुस्तक 'अतीत से वर्तमान तक : नैनीताल का सफर और गॉथिक राजभवन के निर्माण की अद्भुत गाथा' के लिए दिया गया था। इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए देशभर से कुल 13 लेखकों का चयन हुआ था, जिनमें उत्तराखंड से वह एकमात्र लेखक थे। यह उपलब्धि उनके शोधपरक लेखन और ऐतिहासिक विषयों पर गहरी पकड़ को दर्शाती है। हिंदी पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में डॉ. तिवारी की पहचान देश की सीमाओं से बाहर भी रही है। अमेरिका, हंगरी और मॉरीशस स्थित भारतीय दूतावासों के साथ-साथ थाईलैंड और सिंगापुर की प्रतिष्ठित संस्थाओं एवं विश्वविद्यालयों की ओर से भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। पत्रकारिता विषय पर उनकी तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इनमें से एक पुस्तक का विमोचन मॉरीशस के राष्ट्रपति ने वहां के राष्ट्रपति भवन में किया था, जो उनके साहित्यिक और अकादमिक कार्यों की अंतरराष्ट्रीय पहचान का प्रमाण है। लेखन और शोध के क्षेत्र में भी उनका योगदान व्यापक रहा है। उनके दो दर्जन से अधिक शोध पत्र और एक हजार से ज्यादा लेख विभिन्न माध्यमों में प्रकाशित हो चुके हैं। इससे पहले उन्हें उत्तराखंड रत्न, राज्य सूचना आयोग का आरटीआई अवार्ड और अंतरराष्ट्रीय भारत सम्मान अचीवर्स अवार्ड सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है। उत्तराखंड गौरव सम्मान मिलने के साथ ही डॉ. गिरीश रंजन तिवारी की उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत योगदान का अभिनंदन है, बल्कि उत्तराखंड की पत्रकारिता, हिंदी साहित्य, शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत के लिए किए गए उनके दीर्घकालीन प्रयासों की भी पहचान है। नैनीताल से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक अपनी लेखनी की छाप छोड़ने वाले डॉ. तिवारी की यह उपलब्धि प्रदेश के साहित्य और पत्रकारिता जगत के लिए गौरवपूर्ण क्षण बन गई है।


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