उत्तराखंड में चुनावी तैयारियों को नई धार: जून में शुरू होगा 'विशेष गहन पुनरीक्षण', 87 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पूरी
देहरादून। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद अब भारत निर्वाचन आयोग का पूरा ध्यान उत्तराखंड की ओर मुड़ गया है। राज्य में मतदाता सूचियों को त्रुटिहीन और अपडेटेड बनाने के लिए आयोग जल्द ही विशेष गहन पुनरीक्षण की घोषणा करने जा रहा है। माना जा रहा है कि जून महीने में इस अभियान को प्रदेशभर में युद्ध स्तर पर चलाया जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम के कुशल नेतृत्व में प्रदेश में पिछले कई महीनों से प्री-एसआईआर गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मतदाताओं के डेटा को डिजिटल रूप से व्यवस्थित करना है। विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के कुल 84 लाख मतदाताओं में से लगभग 87 प्रतिशत की बीएलओ मैपिंग पूरी की जा चुकी है। यह मैपिंग वर्ष 2003 की आधार मतदाता सूची के सापेक्ष की गई है, ताकि प्रत्येक मतदाता के निवास और पहचान की सटीक पुष्टि हो सके। वर्तमान में उत्तराखंड में जनगणना का कार्य भी प्रगति पर है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 24 मई को जनगणना का पहला चरण संपन्न हो जाएगा। निर्वाचन आयोग की रणनीति है कि जनगणना का शुरुआती काम पूरा होते ही एसआईआर शुरू किया जाए, ताकि दोनों प्रक्रियाओं के डेटा का सही तालमेल बैठ सके। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो जून के प्रथम या द्वितीय सप्ताह में आयोग इसकी औपचारिक घोषणा कर सकता है। इस बार का एसआईआर कई मायनों में महत्वपूर्ण है। शेष 13 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग को भी जून तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवाओं को मतदाता सूची से जोड़ने का यह स्वर्णिम अवसर होगा। फर्जी या दोहरी प्रविष्टियों को हटाकर मतदाता सूची को पूरी तरह 'क्लीन' किया जाएगा। राज्य निर्वाचन कार्यालय ने अपनी सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। जून में होने वाले इस गहन पुनरीक्षण से न केवल मतदाता सूची आधुनिक होगी, बल्कि आने वाले आगामी चुनावों के लिए एक ठोस और पारदर्शी आधार भी तैयार होगा। विभाग ने सभी बीएलओ और अधिकारियों को इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं।