चुनाव स्पेशल:क्या आपको पता है देश मे कब कब चुनावों को रद्द किया गया? चुनाव आयोग का गठन कब और क्यों हुआ? चुनाव आयोग से शिकायत कैसे करें?ये सभी महत्वपूर्ण जानकारी खबर के लिंक में देखिए
कोरोना की तीसरी लहर का डर और आगामी चुनावों को देखते हुए उत्तरप्रदेश में चुनाव स्थगित करने की अपील की जा रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीएम नरेंद्र मोदी से चुनाव टालने की अपील की है।
भारत के संविधान में चुनावों को टालने के लिए अनुच्छेद 324 का प्रावधान है। आइये जानते है भारत मे कब कब चुनावों को टाला गया और क्यों?
1991 में पहले फेज की वोटिंग के बाद राजीव गांधी की हत्या हो गयी थी,जिसके बाद अगले दो फेज के चुनाव में चुनाव आयोग ने करीब एक महीने तक चुनाव टाल दिए थे। सभी राजनीतिक पार्टियां चुनावो के टलने से काफ़ी प्रभावित हुई थी,हालांकि इसका फायदा कांग्रेस को ही मिला।
1991 में ही पटना लोकसभा में भी चुनावों को टाला गया तब बूथ कैप्चरिंग होने पर आयोग ने चुनाव रद्द कर दिए थे।
1995 में बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी बूथ कैप्चरिंग के मामले सामने आये थे जिसके बाद चार बार चुनावी तारीखें आगे बढ़ाई गई थीं। बाद में अर्ध सैनिक बलों की निगरानी में कई चरणों में चुनाव निबटाये गए।
2017 में महबूबा मुफ्ती ने अनंतनाग लोकसभा सीट छोड़ दी थी। वहां उपचुनाव करवाने थे तो आयोग ने सुरक्षाबलों की 750 कंपनियां मांगी, लेकिन केंद्र से 300 कंपनियां ही दी गईं,जिसके बाद आयोग ने अनंतनाग के हालात खराब बताते हुए चुनाव रद्द कर दिया था।
2019 के लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु की वेल्लोर सीट से डीएमके उम्मीदवार के घर से 11 करोड़ कैश बरामद हुआ था, जिसके बाद वहां चुनाव को रद्द कर दिया गया था,चुनाव आयोग (ईसी) ने वहां मतदान रद्द करने के लिए राष्ट्रपति से अनुमति मांगी थी। मंजूरी मिलने पर ईसी के बयान में कहा गया, “14 अप्रैल को हमारी ओर से दी गई सिफारिश को राष्ट्रपति ने मानते हुए वेल्लोर सीट पर चुनाव रद्द कर दिया है।”
आइये अब जानते है चुनाव आयोग के बारे में-
चुनाव आयोग एक स्वायत्त एवं अर्ध-न्यायिक संस्थान है जिसका गठन भारत में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रूप से विभिन्न से भारत के प्रातिनिधिक संस्थानों में प्रतिनिधि चुनने के लिए किया गया था। भारतीय चुनाव आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 को की गयी थी।
चुनाव आयोग का गठन संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत किया गया है। यह एक स्वतंत्र संस्था है, जो कि उच्चतम न्यायालय और भारतीय राष्ट्रपति के प्रति उत्तरदायी होता है। अनुच्छेद 324 से अनुच्छेद 329 तक उसके काम और अधिकार के बारे में बताया गया है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान आयोग के काम में कोई दखल नहीं दे सकता है। यहां तक कि कई मामलों में तो न्यायपालिका भी हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। इसके अलावा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 भी चुनाव आयोग के कामकाज का खाका खींचता है। चुनाव आयोग के पास राजनीतिक दलों को पंजीकृत करने का अधिकार तो है, लेकिन किसी पार्टी का पंजीकरण रद्द करने का अधिकार नहीं है।
इसमें एक मुख्य चुनाव आयुक्त और दो अन्य चुनाव आयुक्त होते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 साल जो पहले हो तब तक होगा, तथा अन्य चुनाव आयुक्तों का कार्यकाल 6 वर्ष या 62 साल होता हैं।
चुनाव आयोग से कैसे शिकायत करें।
आचार संहिता के समय कई प्रकार से लोगों द्वारा इसका उल्लंघन किया जाता है, यदि आपके क्षेत्र में इस प्रकार की घटना घटित होती है, तो आप इसकी शिकायत दर्ज कर सकते है। आप कई प्रकार से इसकी शिकायत कर सकते है, पहले के समय में केवल पत्रों के माध्यम से इसकी शिकायत दर्ज या पुलिस चौकी जाकर ही इसकी शिकायत दर्ज की जा सकती थी , लेकिन आज के समय आप सी-विजिल (C-VIGIL) एप के माध्यम से तुरंत शिकायत दर्ज कर सकते है, इस पर शिकायत करने से 100 मिनट के अंदर कार्यवाही करने का आश्वासन दिया गया है।
आप 1950 नंबर डायल करके भी इसकी शिकायत सीधे चुनाव आयोग से कर सकते है | यह एक टोल फ्री नंबर है। चुनाव आयोग ने 24 घंटे कॉल करने की सुविधा दी हुई है, आप जैसे इस पर शिकायत करते है, चुनाव आयोग तुरंत ही नजदीकी चुनाव नियंत्रण केंद्र को इसकी जानकारी देगा जिससे तुरंत कार्यवाही होगी। इस प्रकार आप शिकायत कर सकते है।