चुनाव खत्म, वसूली शुरू...: ईंधन की कीमतों में लगी आग, कांग्रेस का केंद्र पर तीखा प्रहार
नई दिल्ली। देश में शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुए अचानक इजाफे ने न केवल आम आदमी की जेब पर असर डाला है, बल्कि देश के राजनीतिक तापमान को भी बढ़ा दिया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए इस बढ़ोतरी को 'जनता पर कोड़े बरसाने' जैसा कृत्य करार दिया है। कांग्रेस ने ईंधन की कीमतों में हुई इस वृद्धि को हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों से जोड़ते हुए इसे सरकार की 'वसूली' बताया है।
ईंधन के बढ़े दामों पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक कड़ा पोस्ट साझा किया। कांग्रेस ने तंज कसते हुए लिखा, "महंगाई-मैन मोदी ने आज एक बार फिर जनता पर कोड़े बरसाए हैं। पेट्रोल और डीजल की कीमतें 3-3 रुपये और सीएनजी 2 रुपये महंगी कर दी गई है। चुनाव खत्म - मोदी की वसूली शुरू।" कांग्रेस का आरोप है कि सरकार चुनावों के खत्म होने का इंतज़ार कर रही थी और जैसे ही मतदान की प्रक्रिया पूरी हुई, जनता पर महंगाई का बोझ डाल दिया गया। शुक्रवार सुबह से लागू हुई नई दरों के बाद राजधानी दिल्ली में तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं, डीजल की दरें 87.67 रुपये से बढ़कर 90.67 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई हैं। सीएनजी की कीमतों में भी 2 रुपये की वृद्धि की गई है, जिससे ऑटो और टैक्सी के साथ-साथ आम शहरी परिवहन भी महंगा होना तय माना जा रहा है। ईंधन की कीमतों में इस भारी उछाल के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारणों को मुख्य वजह माना जा रहा है। इस वर्ष 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-इज़रायल और ईरान युद्ध के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में संकट गहरा गया है। पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने के कारण समुद्री व्यापार का महत्वपूर्ण मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य, नाकाबंदी का सामना कर रहा है। इसी भू-राजनीतिक तनाव का नतीजा है कि ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार की इस अस्थिरता का सीधा असर घरेलू कीमतों पर दिखाई दे रहा है। एक तरफ जहां विपक्ष हमलावर है, वहीं सरकार ने स्थिति को स्पष्ट करने का प्रयास किया है। केंद्र सरकार ने साफ किया है कि अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद भारत में ईंधन की कोई कमी नहीं है और देश के पास ऊर्जा की पर्याप्त आपूर्ति मौजूद है। हालांकि, ब्रेंट ऑयल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने तेल कंपनियों के लिए पुरानी दरों पर आपूर्ति जारी रखना मुश्किल कर दिया था। जानकारों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई महंगी होगी, जिसका सीधा असर आने वाले दिनों में फल, सब्जी और अन्य दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा। विपक्ष के कड़े रुख के बीच अब जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार बढ़ी हुई कीमतों को कम करने के लिए एक्साइज ड्यूटी में कोई कटौती करेगी या महंगाई का यह सिलसिला यूं ही जारी रहेगा।