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बिजली विभाग का गज़ब कारनामा: दूसरे के घर पर दे दिया कनेक्शन, 9 साल बाद नोटिस आया तो उड़े असली मालिक के होश

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 11, 2026 07:07 AM
Electricity Department's Bizarre Blunder: Connection Installed at Someone Else's House; Real Owner Stunned Upon Receiving Notice After 9 Years

रुड़की। उत्तराखंड के रुड़की से बिजली विभाग की घोर लापरवाही और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाने वाला एक बेहद अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहाँ विद्युत वितरण खंड के अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर एक व्यक्ति के आवासीय पते पर किसी दूसरे ही अज्ञात व्यक्ति के नाम से बिजली का कनेक्शन जारी कर दिया। इस बड़े फर्जीवाड़े या लापरवाही का खुलासा तब हुआ, जब असली मकान मालिक के पते पर बिजली विभाग द्वारा कनेक्शन काटने का नोटिस भेजा गया। इस मामले को राज्य सूचना आयोग ने बेहद गंभीरता से लेते हुए विभाग के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।

पूरा मामला रुड़की निवासी संदीप कुमार से जुड़ा है। संदीप कुमार ने इस गड़बड़ी के खिलाफ राज्य सूचना आयोग में अपील दाखिल की थी। मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने बताया कि साल 2016 में उनके वैध आवासीय पते पर विभाग द्वारा एक अन्य व्यक्ति को बिजली कनेक्शन अलॉट कर दिया गया था। आश्चर्य की बात यह है कि यह कनेक्शन साल 2021 तक सुचारू रूप से चलता रहा और पीड़ित परिवार को इसकी कानोंकान भनक तक नहीं लगी। इसके बाद साल 2025 में विभाग ने एक नोटिस जारी कर इस कनेक्शन को काटने की सूचना संदीप के पते पर भेजी, जिसे देखकर पूरा परिवार दंग रह गया। सुनवाई के दौरान पीड़ित संदीप कुमार ने विभाग की नीयत और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि नियमानुसार बिजली का नया कनेक्शन जारी करने से पहले जूनियर इंजीनियर या संबंधित लाइनमैन द्वारा उस पते का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) और निरीक्षण किया जाता है। ऐसे में विभाग को अब यह साफ-साफ स्पष्ट करना चाहिए कि उनके मालिकाना हक वाले पते पर किसी दूसरे का कनेक्शन कागजों में कैसे पास हो गया और वह दूसरी जगह कैसे चलता रहा? राज्य सूचना आयोग ने इस पूरे प्रकरण को अधिकारियों की भारी लापरवाही और 'कदाचार' (Misconduct) का गंभीर मामला माना है। आयोग ने बिजली विभाग के आला अधिकारियों को इस पूरे मामले की अपने स्तर पर उच्चस्तरीय जांच करने के सख्त आदेश दिए हैं। इसके साथ ही, आयोग ने विभाग को निर्देशित किया है कि पीड़ित संदीप कुमार द्वारा मांगी गई सभी संबंधित जानकारियां और दस्तावेज आगामी 10 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराए जाएं, ताकि दोषियों की जवाबदेही तय की जा सके।


 


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