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वैश्विक युद्ध और अस्थिरता के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बड़ी राहत,रूस से कच्चा तेल और अमेरिका से रसोई गैस लेकर मंगलुरु पहुंचे विशाल जहाज

editor
  • Tapas Vishwas
  • March 22, 2026 10:03 AM
En medio de la guerra y la inestabilidad mundiales, la seguridad energética de la India recibe un importante impulso con la llegada a Mangaluru de un enorme buque que transporta petróleo crudo procedente de Rusia y gas para cocinar procedente de Estados Unidos.

मंगलुरु (कर्नाटक)। पश्चिम एशिया में इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और वैश्विक स्तर पर छाई अनिश्चितता के बाद भारत की ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले स्थित न्यू मंगलुरु पोर्ट (NMPT) पर शनिवार और रविवार को ईंधन की भारी खेप लेकर दो विशाल मालवाहक जहाज सुरक्षित पहुंच गए हैं। रूस से कच्चे तेल और अमेरिका से रसोई गैस (LPG) की इस सफल आवक को भारत की रणनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।

शनिवार देर रात रूस के प्रिमोर्स्क बंदरगाह से रवाना हुआ विशालकाय जहाज 'एक्वा टाइटन' मंगलुरु तट पर पहुंचा। इस जहाज में लगभग 96,000 मीट्रिक टन 'यूराल क्रूड ऑयल' (कच्चा तेल) लदा हुआ है। बंदरगाह अधिकारियों के अनुसार, कच्चे तेल की यह बड़ी खेप 'मंगलुरु रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड' की उत्पादन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मंगवाई गई है। वर्तमान में जहाज से तेल को पाइपलाइनों के जरिए रिफाइनरी तक उतारने की प्रक्रिया युद्धस्तर पर जारी है। वैश्विक प्रतिबंधों और युद्ध की आहट के बीच रूस से तेल की यह निर्बाध आपूर्ति भारतीय बाजार में ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने में सहायक सिद्ध होगी। कच्चे तेल के साथ-साथ रसोई गैस के मोर्चे पर भी रविवार सुबह बड़ी राहत मिली। अमेरिका के टेक्सस से 'पिक्सिस पायोनियर' नामक मालवाहक जहाज 16,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर मंगलुरु बंदरगाह पहुंचा। न्यू मंगलुरु पोर्ट अथॉरिटी के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यह खेप मंगलुरु स्थित 'एजिस गैस स्टोरेज यूनिट' को सप्लाई की जा रही है। रविवार सुबह से ही गैस अनलोडिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू ईंधन की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए अमेरिका से आई यह खेप अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूरी दुनिया की नजरें इस समय लाल सागर और खाड़ी देशों के तनाव पर टिकी हैं, जहाँ से भारत का अधिकांश तेल गुजरता है। ऐसे समय में रूस और अमेरिका जैसे दो बड़े शक्ति केंद्रों से एक साथ ईंधन का पहुंचना भारत की मजबूत विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में उठाए गए ठोस कदमों का प्रमाण है। अधिकारियों ने बताया कि दोनों जहाजों के आगमन के दौरान सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे और अनलोडिंग की प्रक्रिया पूरी तरह सुचारू रूप से चल रही है। न्यू मंगलुरु पोर्ट अथॉरिटी के अधिकारियों के अनुसार, इस आपूर्ति से न केवल दक्षिण भारत बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी रिफाइंड उत्पादों और रसोई गैस की किल्लत की आशंका समाप्त हो जाएगी। आगामी दिनों में कुछ और जहाजों के पहुंचने की उम्मीद है, जिससे भंडार को और मजबूत किया जा सकेगा।


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