बिजली संशोधन बिल के विरोध में उतरे ऊर्जा निगम के अधिकारी कर्मचारी
हरिद्वार। केंद्र सरकार के बिजली संशोधन बिल 2025 को लेकर देशभर के ऊर्जा निगम आज मंगलवार को कार्य बहिष्कार पर हैं। हरिद्वार के मायापुर स्थित ऊर्जा निगम के कार्यालय पर अभियंता संघ और विभाग की यूनियनों के कर्मचारियों ने भी कार्य बहिष्कार और विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और इस बिल को वापस लेने की मांग की। कार्य बहिष्कार पर रहे यूपीसीएल कर्मियों का कहना है कि इस बिल से सरकारी ऊर्जा निगमों को नुकसान पहुंचेगा। जबकि पूंजीपतियों को फायदा होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इस बिल को संसद में पास नहीं होने दिया जाएगा। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन और विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर हरिद्वार के मायापुर स्थित ऊर्जा निगम कार्यालय पर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और सरकार से बिल वापस लेने की मांग की।
इस दौरान अभियंता संघ के उपाध्यक्ष अनिल कुमार मिश्रा ने आरोप लगाया कि सरकार ऊर्जा क्षेत्र का निजीकरण करने जा रही है। इसलिए विद्युत संशोधन बिल को संसद में पेश करने की तैयारी है। आरोप लगाया कि पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए ही बिल लाया गया है। यदि यह बिल पास होता है तो आने वाले समय में निजी कंपनियां अपनी मनमर्जी के अनुसार उपभोक्ता चुनेग। वो बीपीएल, किसान और मजदूर वर्ग को सस्ती बिजली नहीं देंगे। इसके साथ ही ऊर्जा निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों की नौकरी खतरे में आ जाएगी। नए बिल में निजी क्षेत्र की कंपनियां मनमाने ढंग से कार्य करेंगी। इसलिए नया बिल ऊर्जा निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की उपेक्षा का प्रयास है। ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता दीपक सैनी ने चेतावनी देते हुए कहा यदि सरकार विद्युत संशोधन बिल 2025 को वापस नहीं लेती है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉईज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर उत्तराखंड के सभी विद्युत अधिकारी और कर्मचारी बड़े आंदोलन करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।