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पापा मेरे शव को हाथ न लगाएंः सुसाइड नोट में छलका सालों का दर्द! कचहरी की पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर वकील ने खत्म की जिंदगी, सुसाइड नोट ने खोल दी घर की कड़वी सच्चाई

editor
  • Awaaz Desk
  • April 24, 2026 07:04 AM
Father, please don't touch my body: Suicide note reveals years of pain! Lawyer ends life by jumping from the fifth floor of courthouse; suicide note reveals the bitter truth behind family matters.

कानपुर। यूपी के कानपुर की कचहरी में घटी एक घटना ने पूरे देश को झंकझोर कर रख दिया है। यहां 24 वर्षीय प्रशिक्षु अधिवक्ता प्रियांशु श्रीवास्तव ने अपनी जीवन यात्रा को एक सुसाइड नोट में समेटते हुए दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन पीछे छोड़ गए कई सवाल, कई पीड़ाएं और एक परिवार की टूटती कहानी। दरअसल यह सिर्फ एक आत्महत्या नहीं, बल्कि एक युवा मन के भीतर लंबे समय से चल रहे संघर्ष की दर्दनाक परिणति है।

प्रियांशु ने अपनी आखिरी चिट्ठी में साफ लिखा कि उसकी अंतिम इच्छा है, जो भी इस नोट को पढ़े, वह इसे अंत तक जरूर पढ़े। यह केवल शब्द नहीं थे, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति की आखिरी कोशिश थी, जो शायद जीवन भर सुना नहीं गया। बचपन से ही पिता की सख्ती और अपमानजनक व्यवहार ने उसके मन पर गहरे घाव छोड़े। उसने लिखा कि महज छह साल की उम्र में एक छोटी-सी गलती ‘फ्रिज से मैंगोशेक पी लेने’ पर उसे निर्वस्त्र कर घर से बाहर निकाल दिया गया। यह घटना उसके आत्मसम्मान को इस कदर तोड़ गई कि वह दर्द जीवन भर उसका पीछा करता रहा। समय बीतता गया, लेकिन हालात नहीं बदले। पढ़ाई को लेकर दबाव, हर छोटी बात पर शक, और बार-बार सार्वजनिक रूप से अपमान ये सब उसके लिए मानसिक यातना बनते गए। उसने स्वीकार किया कि पढ़ाई के लिए डांट या सख्ती तक वह सह सकता था, लेकिन हर पल की निगरानी और अपमान ने उसे भीतर से खत्म कर दिया। उसने अपने सुसाइड नोट में यह भी लिखा कि पिता की दखलअंदाजी उसके जीवन के हर पहलू में थी, किससे बात कर रहा है, कहां जा रहा है, किसका फोन आया? सब पर नजर रखी जाती थी। इसके बावजूद उसने अपने परिवार के लिए जिम्मेदारियां निभाईं। ट्यूशन पढ़ाकर और ऑनलाइन काम करके उसने घर की मदद की, पिता के लिए मोबाइल और बहन के लिए फोन व स्कूटी तक खरीदी। लेकिन इसके बाद भी उसे सम्मान नहीं मिला। घटना से कुछ घंटे पहले हुए विवाद ने उसे पूरी तरह तोड़ दिया। उसने लिखा, इतनी बंदिशों और बेइज्जती के साथ मैं जी नहीं सकता। उसकी पंक्तियां ‘पापा जीत गए... उन्हें जीत मुबारक हो’ उस गहरे दर्द को दर्शाती हैं, जिसे वह वर्षों से ढो रहा था। हालांकि अपने नोट में प्रियांशु ने यह भी लिखा कि उसके पिता के खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए,। वहीं सुसाइड नोट में अपनी मां और बहन के लिए प्रियांशु ने ढेर सारा प्यार जताया।

तीन घंटे पहले ही व्हाट्सएप स्टेटस पर लगाया सुसाइड नोट
दरअसल, बर्रा-8 वरुण विहार के रहने वाले 24 वर्षीय प्रियांशु श्रीवास्तव ने गुरुवार को न्यायालय भवन की पांचवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। उसने सुसाइड नोट में पिता राजेंद्र कुमार पर आक्रोश व्यक्त किया है। पिता से उसे इतनी नफरत थी कि उसने उन्हें शव छूने तक के लिए मना करने की बात लिखी है। सुसाइड नोट में प्रियांशु ने लिखा है कि ऐसे पिता भगवान किसी को भी न मिले। वहीं उनके पांचवी मंजिल से कूदने के तुरंत बाद पुलिस और कोर्ट की सुरक्षा में तैनात विशेष सुरक्षा बल के जवान उनहें उर्सला ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। प्रियांशु विधि स्नातक की परीक्षा पास करने के बाद अपने पिता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव के साथ बैठकर वकालत का प्रशिक्षण ले रहा था। पांचवीं मंजिल से प्रियांशु जिस जगह गिरा वहां सामान्यतः किसी का आना-जाना नहीं होता है। आसपास कूड़े का ढेर है और वहां आवाजाही का रास्ता भी बंद रहता है। ऊंचाई से गिरने के कारण प्रियांशु का सिर फट गया और मांस के लोथड़े बाहर आ गए थे। चारों ओर खून ही खून बिखरा था।


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