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भोपाल में किसानों का उग्र प्रदर्शन: बैरिकेड्स तोड़े, बसों पर चढ़े युवा,सीएम हाउस घेरने पर अड़े

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 29, 2026 09:07 AM
Fierce protest by farmers in Bhopal: Barricades broken, youths climbed onto buses, and protesters adamant on laying siege to the CM's residence.

भोपाल। अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर 'किसान क्रांति पदयात्रा' निकाल रहे किसानों का प्रदर्शन बुधवार को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में उग्र हो गया। वीर सावरकर सेतु पर रातभर डेरा डालने के बाद सुबह होते ही नर्मदापुरम, हरदा, रायसेन और सीहोर से बड़ी संख्या में किसान भोपाल पहुंचे और मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया। दोपहर बाद युवाओं के जुड़ने से प्रदर्शन में तनाव बढ़ गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड्स घसीटकर हटा दिए और बसों के ऊपर चढ़कर नारेबाजी शुरू कर दी। हालांकि, किसान नेता लगातार शांति की अपील करते रहे, लेकिन सुरक्षा बल स्थिति को संभालने में मशक्कत करते दिखे।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल बुधवार को किसानों के बड़े आंदोलन का केंद्र बन गई। अपनी पांच प्रमुख मांगों को लेकर निकली 'किसान क्रांति पदयात्रा' उस समय उग्र हो गई, जब बड़ी संख्या में किसान मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगे। पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ने, बसों पर चढ़कर नारेबाजी करने और आगे बढ़ने की कोशिश के बीच पूरे इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बन गई। हालांकि किसान नेताओं ने लगातार प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की। किसानों की प्रमुख मांगों में मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीदी, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी, खाद की पर्याप्त उपलब्धता, अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील रद्द करने और किसानों से जुड़े वादों को पूरा करने की मांग शामिल है। इन्हीं मुद्दों को लेकर किसान मुख्यमंत्री आवास तक मार्च निकालने पर अड़े हैं। पुलिस ने किसानों के जत्थे को होशंगाबाद रोड स्थित वीर सावरकर सेतु पर रोक दिया था। इसके बाद हजारों किसानों ने पूरी रात वहीं डेरा डाले रखा। बुधवार सुबह नर्मदापुरम, हरदा, रायसेन और सीहोर सहित कई जिलों से बड़ी संख्या में किसान भोपाल पहुंचे, जिससे आंदोलन ने और व्यापक रूप ले लिया। दोपहर बाद प्रदर्शन उग्र हो गया। कई युवा किसान बसों की छतों पर चढ़ गए और वहीं से नारेबाजी करने लगे। कुछ स्थानों पर किसानों ने पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड हटाने और आगे बढ़ने की कोशिश की। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा, लेकिन बढ़ती भीड़ के कारण प्रशासन को स्थिति नियंत्रित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसके बावजूद किसान संगठनों के वरिष्ठ नेता लगातार प्रदर्शनकारियों से संयम बनाए रखने और शांतिपूर्ण आंदोलन करने की अपील करते रहे। आंदोलन का असर शहर के जनजीवन पर भी पड़ा। संभावित ट्रैफिक जाम और सुरक्षा कारणों से नर्मदापुरम रोड तथा आसपास के कई स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया। कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित रहा और लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ा। किसान नेता गजेंद्र सिंह जाट ने कहा कि यदि प्रशासन उन्हें रोकने का प्रयास करेगा तो किसान मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार उनकी मांगों पर जल्द निर्णय ले, अन्यथा आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। इस बीच आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि सब कुछ ठीक है तो हजारों किसान सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा कर भोपाल क्यों पहुंचे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसानों की मांगों का समर्थन करती है। वहीं, प्रदेश के कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने किसान प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि सरकार मूंग खरीदी सहित किसानों के सभी मुद्दों के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। किसानों से बातचीत के बाद उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर मध्य प्रदेश के लिए मूंग खरीदी का कोटा बढ़ाने का अनुरोध भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों के प्रति संवेदनशील है और पूरे प्रदेश में 'किसान कल्याण वर्ष' मनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए एक समिति गठित की गई है, जो संवाद के माध्यम से समाधान तलाशेगी। मुख्यमंत्री ने किसानों और प्रशासन दोनों से शांति बनाए रखने तथा बातचीत के जरिए रास्ता निकालने की अपील की। फिलहाल भोपाल में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन की नजर आंदोलन की हर गतिविधि पर बनी हुई है, जबकि किसान संगठन अपनी मांगों के समाधान तक आंदोलन जारी रखने के संकेत दे रहे हैं।


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