पहलगाम हमले की पहली बरसी: कश्मीर के पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा का 'अभेद कवच', अब क्यूआर कोड से होगी तस्करों और संदिग्धों की पहचान
श्रीनगर | कश्मीर की वादियों में पर्यटन एक बार फिर अपनी पुरानी चमक बिखेरने लगा है, लेकिन पिछले साल के जख्मों और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम के सुरम्य बैसरन घास के मैदान (मिनी स्विट्जरलैंड) में हुए नृशंस आतंकी हमले की पहली बरसी को देखते हुए पूरी घाटी के पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को 'अल्ट्रा-अलर्ट' मोड पर डाल दिया गया है।
आज से ठीक एक साल पहले, लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों ने मानवता को शर्मसार करते हुए 25 निर्दोष पर्यटकों और एक स्थानीय पोनी-राइडर की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस हमले ने न केवल कश्मीर की छवि को चोट पहुँचाई थी, बल्कि करीब 50 पर्यटन स्थलों को बंद करने पर मजबूर कर दिया था। अब, एक साल बाद जब घाटी फिर से गुलजार है, तो पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां किसी भी प्रकार की कोताही बरतने के मूड में नहीं हैं। इस साल प्रशासन ने पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। पहलगाम में अब सेवा देने वाले हर व्यक्ति चाहे वह टट्टू वाला हो, फेरीवाला हो या कोई वेंडर के लिए क्यूआर कोड आधारित पहचान प्रणाली अनिवार्य कर दी गई है। हर पंजीकृत सेवा प्रदाता के पास एक यूनिक QR कोड होगा। जब कोई पर्यटक अपने मोबाइल से इसे स्कैन करेगा, तो उसे संबंधित व्यक्ति का नाम, पिता का नाम, पता, मोबाइल नंबर, पंजीकरण संख्या और उसके कार्य करने का अधिकृत रूट दिखाई देगा। इस सिस्टम से केवल पुलिस द्वारा सत्यापितलोग ही पर्यटकों तक पहुँच सकेंगे, जिससे फर्जी और संदिग्ध तत्वों की पहचान आसान हो जाएगी। कश्मीर के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस वी.के. बिर्दी ने हाल ही में पीसीआर कश्मीर में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में पुलिस, सीआरपीएफ, बीएसएफ और आईटीबीपी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बिर्दी ने निर्देश दिए कि सभी संवेदनशील पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा के इंतजामों को और मजबूत किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में घाटी में होने वाले आयोजनों और पर्यटकों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भले ही पिछले साल की यादें डराती हैं, लेकिन बैसरन के मैदानों में पर्यटकों का उत्साह कम नहीं हुआ है। सुरक्षा ऑडिट के बाद चरणों में खोले गए इन स्थलों पर अब हजारों की संख्या में लोग पहुँच रहे हैं। पर्यटकों का कहना है कि प्रशासन द्वारा उठाए गए नए सुरक्षा उपायों, विशेषकर QR कोड सिस्टम से वे खुद को अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। बरसी की पूर्व संध्या पर किसी भी संभावित विध्वंसक गतिविधि को रोकने के लिए पुख्ता जमीनी तैयारी की गई है। जंगलों से सटे इलाकों और प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा बलों की अतिरिक्त टुकड़ियाँ तैनात की गई हैं। अधिकारियों ने हाल ही में व्यवस्थाओं की समीक्षा की है और सभी सुरक्षा एजेंसियों को आपसी तालमेल बनाए रखने के निर्देश दिए हैं ताकि पर्यटक बिना किसी खौफ के कश्मीर की खूबसूरती का आनंद ले सकें।