पहली बार दो पत्रकारों को अभिव्यक्ति की आज़ादी की रक्षा करने के लिए मिलेगा नोबेल पुरस्कार
दुनियाभर में शांति को बढ़ावा देने वालों को हर साल (Nobel peace prize) नोबेल शांति पुरस्कार दिया जाता है। इस वर्ष नोबेल कमेटी ने इस सम्मान के लिए दो पत्रकारों (journalist)को भी चुना है। जी हां! इन दोनों पत्रकारों को कमेटी ने अभिव्यक्ति की आज़ादी की रक्षा करने के लिए चुना है। कमेटी का मानना है कि बोलने की आज़ादी ही लोकतंत्र और स्थायी शांति की पहली शर्त होती है। इन पत्रकारों में से एक महिला पत्रकार रैप्लर मीडिया ग्रुप की संस्थापक मारिया रेसा (Maria Ressa) है जो कि एक अमेरीकी पत्रकार है। दूसरे रूस के पत्रकार दिमित्री मुरातोव(Dimitry Muratov) है। आइये विस्तार से जानते है इन दोनों पत्रकारों के बारे में।
*मारिया रेसा*
मारिया रेसा अमेरिकी पत्रकार है और न्यूज़ साईट रैप्लर की सह संस्थापक है। उन्हें फिलीपींस में सत्ता की ताकत का गलत इस्तेमाल, तानाशाही, हिंसा इत्यादि के बढ़ते खतरे पर खुलासों के लिए पहले भी अवार्ड मिल चुके है। उनकी बेबाक और निष्पक्ष पत्रकारिता और अभिव्यक्ति की आज़ादी में उनकी अहम भूमिका की प्रशंसा करते हुए नोबेल कमेटी (Committee)में उन्हें नोबेल पुरस्कार का हकदार बताया।
*दिमित्री मुरातोव*
रूस के जाने माने पत्रकार दिमित्री मुरातोव को भी नोबेल कमेटी ने इस पुरस्कार के लिए चुना है। दिमित्री रूस के स्वतंत्र न्यूजपेपर नोवाज़ा गजेटा के सह संस्थापक है ,पिछले 24 सालों से दिमित्री इसी अखबार में सम्पादक के तौर पर भी काम कर चुके है। रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की तानाशाही ले बावजूद दिमित्री ने अपने न्यूजपेपर के माध्यम से पुतिन की जमकर आलोचना की थी। नोबेल कमेटी ने दिमित्री के बारे में कहा कि दिमित्री रूस में दशकों से अभिव्यक्ति की आज़ादी की रक्षा कर रहे है।
आपको बता दें कि नोबेल पुरस्कारों की घोषणा की शुरुआत चार अक्टूबर को ‘चिकित्सा के लिए नोबेल पुरस्कार’ के साथ हो गई है। पांच अक्टूबर को भौतिकी, छह अक्टूबर को रसायन शास्त्र, सात अक्टूबर को साहित्य और 11 अक्टूबर को अर्थशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार की घोषणा की जाएगी। शांति और अन्य नोबेल पुरस्कार हर साल 10 दिसंबर को प्रदान किए जाते हैं। नोबेल फाउंडेशन द्वारा स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल की याद में वर्ष 1901 में शुरू किया गया यह शांति, साहित्य, भौतिकी, रसायन, चिकित्सा विज्ञान और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में विश्व का सर्वोच्च पुरस्कार है। इस पुरस्कार के रूप में प्रशस्ति-पत्र के साथ 10 लाख डॉलर की राशि प्रदान की जाती है। अल्फ्रेड नोबेल ने कुल 355 आविष्कार किए जिनमें डायनामाइट का आविष्कार भी था। दिसंबर 1896 में मौत से पहले अल्फ्रेड नोबेल ने अपनी संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा एक ट्रस्ट के लिए सुरक्षित रख दिया। उनकी इच्छा थी कि इस पैसे के ब्याज से हर साल उन लोगों को सम्मानित किया जाए जिनका काम मानव जाति के लिए सबसे कल्याणकारी पाया जाए। स्वीडिश बैंक में जमा इसी राशि के ब्याज से नोबेल फाउंडेशन द्वारा हर वर्ष शांति, साहित्य, भौतिकी, रसायन, चिकित्सा विज्ञान और अर्थशास्त्र में सर्वोत्कृष्ट योगदान के लिए यह पुरस्कार दिया जाता है।