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उत्तराखंड के पूर्व आईपीएस लोकेश्वर सिंह पर गिरेगी गाज: कोर्ट ने दिया मुकदमा दर्ज करने का आदेश, व्यापारी को निर्वस्त्र कर पीटने का आरोप

editor
  • Tapas Vishwas
  • April 12, 2026 12:04 PM
Former Uttarakhand IPS Officer Lokshwar Singh Faces Legal Action: Court Orders Registration of Case Amid Allegations of Stripping and Beating a Businessman

पिथौरागढ़। उत्तराखंड में एक पूर्व आईपीएस अधिकारी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संजय सिंह की अदालत ने पिथौरागढ़ के पूर्व एसपी लोकेश्वर सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। यह आदेश स्थानीय व्यापारी लक्ष्मी दत्त जोशी की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों के आधार पर दिया गया है।

अधिवक्ता आशीष हावर्ड के अनुसार, अदालत ने 7 अप्रैल 2026 को धारा 175(3) बीएनएस 2023 के तहत दाखिल प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए कोतवाली पिथौरागढ़ के प्रभारी निरीक्षक को निर्देश दिया है कि आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया जाए। इनमें मारपीट, गलत तरीके से कैद, अपमानित करने के इरादे से हमला, धमकी और लूट जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं। पीड़ित लक्ष्मी दत्त जोशी का आरोप है कि 6 फरवरी 2023 को वह अपनी बेटी के साथ एक शिकायत लेकर एसपी कार्यालय पहुंचे थे। उनका कहना है कि पुलिस क्वार्टर में सीवरेज और बाथरूम सप्लाई लाइन क्षतिग्रस्त थी, जिस पर पहले दी गई शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी मुद्दे को लेकर जब वे एसपी कार्यालय पहुंचे, तो वहां उनके साथ कथित तौर पर अभद्रता और मारपीट की गई। जोशी का आरोप है कि तत्कालीन एसपी लोकेश्वर सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों ने उन्हें निर्वस्त्र कर पीटा और झूठे मामलों में फंसाने की धमकी भी दी। घटना के बाद उन्होंने जिला अस्पताल में मेडिकल कराया, जिसमें चोट लगने की पुष्टि हुई। इसके बाद उन्होंने जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरण में भी शिकायत दर्ज कराई। प्राधिकरण ने 9 दिसंबर 2025 को अपने आदेश में लोकेश्वर सिंह को मारपीट और दुर्व्यवहार का दोषी मानते हुए विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की थी। हालांकि, पीड़ित का आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की, जिसके बाद उन्हें कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। गौरतलब है कि 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी लोकेश्वर सिंह पुलिस सेवा से इस्तीफा दे चुके हैं और वर्तमान में एक अंतरराष्ट्रीय संगठन से जुड़े हैं। कोर्ट के इस आदेश के बाद मामले में कानूनी कार्रवाई तेज होने की संभावना है। यह मामला पुलिस तंत्र की जवाबदेही और कानून के शासन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
 


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