मालदा में एसआईआर में शामिल न्यायिक अधिकारियों को बनाया बंधक, वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन
मालदा। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में विशेष गहन पुनरावृति (SIR) प्रक्रिया को लेकर बुधवार देर रात एक गंभीर घटना सामने आई। कालियाचक-2 के बीडीओ कार्यालय में स्थानीय लोगों ने वोटर लिस्ट से अपने नाम हटाए जाने के विरोध में प्रदर्शन करते हुए सात न्यायिक अधिकारियों को करीब 9 घंटे तक बंधक बना लिया। इनमें तीन महिला न्यायिक अधिकारी भी शामिल थीं।
प्रदर्शनकारी मुख्य रूप से आगामी विधानसभा चुनावों के लिए जारी वोटर लिस्ट में अपने नाम कटने से नाराज थे। बुधवार दोपहर से शुरू हुए इस विरोध प्रदर्शन में लोगों ने बीडीओ ऑफिस के बाहर नारेबाजी शुरू की। जब अधिकारियों से मिलने की अनुमति नहीं मिली तो प्रदर्शनकारियों ने शाम करीब 4 बजे पूरे बीडीओ ऑफिस परिसर को घेर लिया और अंदर फंसे न्यायिक अधिकारियों को बाहर आने नहीं दिया। पुलिस को आधी रात के आसपास हस्तक्षेप करना पड़ा और भारी प्रयास के बाद सातों अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। घटना की जानकारी मिलते ही मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने तुरंत कड़ी नाराजगी जताई और एक्टिंग डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस सिद्ध नाथ गुप्ता से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। जिला मजिस्ट्रेट और एसपी को भी तुरंत मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए गए। यह घटना सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चल रही विशेष गहन पुनरावृति प्रक्रिया के दौरान हुई है। न्यायिक अधिकारी उन वोटरों के मामलों की जांच कर रहे थे जिनके नाम 28 फरवरी को जारी वोटर लिस्ट में ‘अंडर एडजुडिकेशन’ (न्यायाधीन) चिह्नित थे। इन नामों को अंतिम रूप से लिस्ट में रखना या हटाना तय करना था। गुरुवार सुबह ओल्ड मालदा में भी इसी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन हुआ। यहां कुछ लोगों ने नारायणपुर बीएसएफ कैंप के पास नेशनल हाईवे-12 को जाम कर दिया। प्रशासन ने पहले से ही सतर्कता बरती हुई थी, इसलिए पुलिस और केंद्रीय बलों की भारी तैनाती के कारण स्थिति जल्द नियंत्रण में आ गई। प्रदर्शनकारी मैनुल हक ने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के नाम चुन-चुनकर हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पहले स्पष्ट किया था कि 2002 की वोटर लिस्ट में माता-पिता का नाम होने वाले व्यक्तियों के नाम स्वतः शामिल हो जाएंगे, लेकिन अब ‘लॉजिकल एरर’ का हवाला देकर कई सही वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं। मैनुल हक का दावा है कि उनके इलाके के 7-8 गांवों में वोटरों के बाहर होने की दर लगभग 50 प्रतिशत है। कई परिवार 150 साल से यहां रह रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कई अयोग्य वोटरों के नाम लिस्ट में शामिल हैं, जिसका वे कड़ा विरोध करते हैं। चुनाव आयोग ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया है और जिला प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के साथ-साथ SIR प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरा करने पर जोर दिया गया है।