चारधाम यात्रा पर 'गैस संकट' का पहरा हटा: मुख्य सचिव का सख्त आदेश-खत्म करें बैकलॉग,न हो पैनिक बुकिंग
देहरादून। आगामी चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन के दौरान उत्तराखंड में रसोई गैस की किल्लत न हो, इसके लिए शासन ने कमर कस ली है। मंगलवार को मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में तेल कंपनियों और सभी जिलाधिकारियों के साथ हाई-लेवल मीटिंग की। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था चारधाम यात्रा पर टिकी है, इसलिए यात्रा मार्ग के होटलों, ढाबों और रेस्टोरेंटों को कमर्शियल गैस की आपूर्ति में रत्ती भर भी बाधा नहीं आनी चाहिए। उन्होंने तेल कंपनियों को घरेलू गैस का बैकलॉग तत्काल शून्य करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव ने बताया कि अप्रैल से नवंबर तक चलने वाली यात्रा के दौरान राज्य में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, जिससे गैस की मांग कई गुना बढ़ जाती है। मानसून के दौरान अतिवृष्टि और आपदा की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार भारत सरकार को पत्र भेज रही है। मांग की गई है कि उत्तराखंड को व्यावसायिक एलपीजी का 100 प्रतिशत आवंटन पूर्ववत रखा जाए और आपदा राहत कार्यों के लिए 5 प्रतिशत अतिरिक्त कोटा (लगभग 48,397 सिलेंडर) आवंटित किया जाए। यात्रा अवधि के लिए कुल 9.67 लाख व्यावसायिक सिलेंडरों की आवश्यकता का आकलन किया गया है। गैस की कृत्रिम कमी और कालाबाजारी रोकने के लिए प्रदेश भर में 9 मार्च से महा-अभियान चल रहा है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति सचिव आनंद स्वरूप ने बताया कि अब तक 5934 निरीक्षण किए जा चुके हैं। इस दौरान गंभीर अनियमितताओं पर 17 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। प्रवर्तन टीमों ने कार्रवाई करते हुए 864 घरेलू और 168 कमर्शियल सिलेंडर जब्त किए हैं। साथ ही अवैध रिफिलिंग किट और एक पिकअप वाहन भी पकड़ा गया है। अब तक दोषियों पर एक लाख रुपये से अधिक का अर्थदंड भी लगाया गया है। मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने जिलों में आपूर्ति की निरंतर निगरानी करें। उन्होंने कहा कि बाजार में उपलब्धता बढ़ाकर पैनिक की स्थिति को खत्म किया जाए। यदि तेल कंपनियों को संचालन या लॉजिस्टिक (आवागमन) में कोई समस्या आ रही है, तो प्रशासन उसे तुरंत हल करे। बैठक में फीडबैक मिला कि अब पैनिक बुकिंग की प्रवृत्ति में कमी आई है और आपूर्ति व्यवस्था में सुधार हो रहा है।
मुख्य सचिव के कड़े निर्देश—
घरेलू गैस: यदि कोई डिलीवरी पेंडिंग (बैकलॉग) है, तो उसे प्राथमिकता पर तुरंत निपटाएं।
कमर्शियल गैस: होटल-रेस्टोरेंट व्यवसायियों को सप्लाई में कोई शिकायत नहीं मिलनी चाहिए।
निगरानी: जिलाधिकारी खुद फील्ड में उतरकर सुनिश्चित करें कि कहीं कृत्रिम संकट तो पैदा नहीं किया जा रहा।
पारदर्शिता: ई-पॉश और बायोमीट्रिक ट्रांजेक्शन के जरिए हर सिलेंडर का हिसाब रखा जाए।