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सोनप्रयाग और गौरीकुंड स्टेशन का जियो-टेक्निकल सर्वे मुकम्मल! देहरादून से सोनप्रयाग तक कंटेनरों का ड्राई रन भी रहा पूरी तरह सफल

editor
  • Tapas Vishwas
  • June 23, 2026 11:06 AM
Geotechnical survey of Sonprayag and Gaurikund stations completed! Dry run of containers from Dehradun to Sonprayag also fully successful.

देहरादून। उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा को सुगम, सुरक्षित और अत्याधुनिक बनाने की दिशा में त्रियुगीनारायण-केदारनाथ और गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाओं ने अब धरातल पर तेज रफ्तार पकड़ ली है। केदारनाथ धाम तक बनने वाले इस महा-रोपवे के लिए अत्याधुनिक लिडार सर्वे और पूरी वीडियोग्राफी का महत्वपूर्ण कार्य सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया गया है।

परियोजना की व्यावहारिक तैयारियों को परखने के लिए देहरादून से सोनप्रयाग तक विशाल कंटेनरों के साथ लॉजिस्टिक्स का एक 'ड्राई रन' परीक्षण भी किया गया, जो पूरी तरह सफल रहा है। सचिवालय में आयोजित उत्तराखंड रोपवे डेवलपमेंट लिमिटेड के निदेशक मंडल की दूसरी महत्वपूर्ण बैठक में नेशनल हाईवेज लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड के शीर्ष अधिकारियों ने इस पूरी प्रगति रिपोर्ट को शासन के सामने रखा। केदारनाथ रोपवे परियोजना के तहत यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए मिट्टी और चट्टानों के परीक्षण का काम एडवांस स्टेज में पहुंच गया है। निर्माण कंपनी ने रूट पर जियो-टेक्निकल जांच तेजी से शुरू कर दी है। इस कड़ी में बेस स्टेशन सोनप्रयाग और मुख्य पड़ाव गौरीकुंड स्टेशन के निर्माण के लिए जरूरी जियो-टेक्निकल सर्वे को पूरी तरह मुकम्मल कर लिया गया है। इसके अलावा, गौरीकुंड से बाबा केदार के दर तक अत्यधिक सुरक्षित और बाधा रहित हवाई मार्ग तलाशने के लिए टोपोग्राफी सर्वे भी पूरा हो चुका है। सोनप्रयाग से गौरीकुंड होते हुए सीधे केदारनाथ धाम तक के पूरे हवाई मार्ग (रूट) का तकनीकी अलाइनमेंट अब पूरी तरह तैयार है। अधिकारियों के मुताबिक, इसी महीने यानी जून 2026 में इस अलाइनमेंट पर उच्च स्तरीय समिति द्वारा फाइनल मुहर लगा दी जाएगी, जिसके तुरंत बाद निर्माण कार्य के अगले चरण की शुरुआत होगी। पहाड़ी और दुर्गम रास्तों पर रोपवे निर्माण सामग्री पहुंचाने की चुनौती से निपटने के लिए, देहरादून से सोनप्रयाग के बीच भारी कंटेनरों का परिवहन परीक्षण (ड्राई रन) किया गया। इससे यह साफ हो गया है कि निर्माण के दौरान भारी मशीनों को साइट तक पहुंचाने में कोई व्यावहारिक बाधा नहीं आएगी। बैठक में अधिकारियों ने सिखों के पवित्र तीर्थ स्थल हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजना को लेकर भी ताजा अपडेट साझा किया। गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक बनने वाले इस रोपवे के लिए वर्तमान में विस्तृत भूमि सर्वेक्षण का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। शासन ने दोनों ही परियोजनाओं को तय समय सीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूरा करने के कड़े निर्देश दिए हैं, ताकि भविष्य में लाखों श्रद्धालुओं का घंटों का थकाऊ सफर मिनटों में सिमट सके।


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