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अलविदाः हंसाते-हंसाते रूला गए राजू! दीवार देख हीरो बनने पहुंचे मुंबई, पढ़ें ऑटो ड्राइवर से लेकर इंडस्ट्री तक पहुंचने का दिलचस्प सफर

editor
  • Awaaz24x7 Team
  • September 21, 2022 07:09 AM
 Goodbye: Raju wept while laughing! Seeing the wall, reached Mumbai to become a hero, read the interesting journey from auto driver to industry

नई दिल्ली। दुनिया को हंसाने वाले मशहूर हास्य कलाकार राजू श्रीवास्वत अब हमारे बीच नहीं रहे। करीब 42 दिन से जिंदगी और मौत से लड़ते-लड़ते आज उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा। बता दें कि राजू लंबे समय से दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती थे। हार्ट अटैक आने के बाद उन्हें यहां लाया गया था। पिछले 42 दिन से उनका यहां इलाज चल रहा था। राजू श्रीवास्तव के निधन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित तमाम हस्तियों ने दुख जताया। 

गौरतलब है कि विगत 10 अगस्त की सुबह दिल्ली के साउथ एक्स के कल्ट जिम में वर्कआउट करते समय उन्हें चेस्ट में पेन हुआ और वे नीचे गिर गए थे। इसके बाद उन्हें फौरन अस्पताल में भर्ती कराया गया। राजू हमेशा अपनी फिटनेस पर ध्यान रखते थे और वह फिट और फाइन थे। 31 जुलाई तक वो लगातार शोज कर रहे थे, उनके आगे कई शहरों में शोज भी लाइन अप थे।

अपने हुनर से लोगों को हंसा हंसा कर लोटपोट कर देने वाले राजू श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के रहने वाले थे। राजू श्रीवास्तव का मध्यम वर्गीय परिवार में जन्म हुआ था। मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव के गजोधर भइया के किरदार को कोई भुला नहीं सकता है। द ग्रेट इंडियन लॉफ्टर चैलेंज में इस किरदार के माध्यम से उन्होंने सफलता की पहली सीढ़ी चढ़ी और उसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।  खास बात यह है कि गजोधर भइया कोई काल्पनिक किरदार नहीं हैं, वह राजू के उन्नाव स्थित ममान में रहते थे। 

बताया जाता है कि बचपन से ही राजू घर आए मेहमानों के सामने मिमिक्री करते और स्कूल में टीचर की भी नकल उतारकर लोगों को खूब हंसाते। कई टीचर उन्हें बद्तमीज कहते हुए सजा देते थे, लेकिन एक टीचर ऐसे भी थे जो इन्हें बढ़ावा दिया और कॉमेडी में करियर बनाने की सलाह दी। लोगों ने राजू को लोकल क्रिकेट मैच में कमेंट्री करने की सलाह दी। इससे ये अपने हुनर को कॉन्फिडेंट के साथ लोगों के सामने पेश करने लगे। ये बचपन से ही कॉमेडियन बनना चाहते थे लेकिन असल में इनकी प्रेरणा अमिताभ बच्चन थे। बिग बी की फिल्म दीवार देखने के बाद राजू ने एक्टर बनने का फैसला किया।

राजू बचपन से ही एक्टिंग और कॉमेडी में हाथ आजमाना चाहते थे जिसके लिए वो 1982 में लखनऊ छोड़कर सपनों के शहर मुंबई चले आए। यहां ना रहने को घर था ना खाने के पैसे। घर से भेजे गए पैसे जब कम पड़ने लगे तो राजू ऑटो ड्राइवर बन गए। राजू अपनी सवारी को भी हंसाते थे। मुंबई में राजू को करीब 4-5 सालों तक संघर्ष करना पड़ा था। एक दिन एक सवारी ने राजू के स्टाइल से इंप्रेस होकर उन्हें स्टेज परफॉर्मेंस देने को कहा। राजू मान गए और परफॉर्मेंस दी, जिसके लिए सिर्फ 50 रुपए मिले थे। इसके बाद राजू लगातार स्टेज शो करने लगे।

 


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