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गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करे सरकार': देहरादून में बकरीद की नमाज के बाद मुस्लिम संगठन की बड़ी मांग

editor
  • Tapas Vishwas
  • May 28, 2026 06:05 AM
'Government Should Declare Cow the National Animal': Major Demand by Muslim Organization in Dehradun Following Eid al-Adha Prayers

देहरादून। राजधानी देहरादून में ईद-उल-अजहा (बकरीद) के मुबारक मौके पर एक अनोखा और सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देने वाला नजारा देखने को मिला। चकराता रोड स्थित मुख्य ईदगाह में बकरीद की नमाज मुकम्मल होने के बाद 'मुस्लिम सेवा संगठन' के पदाधिकारियों और सदस्यों ने राज्य व केंद्र सरकार से गाय को 'राष्ट्रीय पशु' घोषित करने की पुरजोर मांग उठाई। नमाज के बाद संगठन से जुड़े लोग ईदगाह के बाहर हाथों में मांग से संबंधित तख्तियां (प्लेकार्ड्स) लेकर एकत्र हुए और सरकार से इस संवेदनशील मुद्दे पर तुरंत स्पष्ट निर्णय लेने की अपील की।

प्रदर्शन और मांग का नेतृत्व कर रहे मुस्लिम सेवा संगठन के उपाध्यक्ष आकिब कुरैशी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि देश में लंबे समय से गाय के नाम पर न केवल राजनीति की जा रही है, बल्कि इसकी आड़ में अक्सर मुस्लिम समुदाय को भी निशाना बनाया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका संगठन काफी लंबे समय से गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने की वकालत करता आ रहा है। आकिब कुरैशी ने केंद्र सरकार पर सीधा सवाल दागते हुए कहा, "यदि सरकार बहुसंख्यक समाज के समर्थन से सत्ता में आने का दावा करती है और गाय वास्तव में देश के बड़े हिस्से की आस्था, श्रद्धा और सम्मान का केंद्र है, तो अब तक इसे राष्ट्रीय पशु घोषित क्यों नहीं किया गया? उन्होंने आगे कहा कि केवल चुनावों के दौरान राजनीतिक लाभ उठाने और ध्रुवीकरण के लिए गाय के मुद्दे को उछालना पूरी तरह अनुचित है। संगठन के पदाधिकारियों ने सर्वसम्मति से कहा कि गाय भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सनातन परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण व अभिन्न हिस्सा है। इसलिए इसके संरक्षण, संवर्धन और सम्मान को संकीर्ण राजनीति से ऊपर उठाकर देखा जाना चाहिए। संगठन ने केंद्र और राज्य दोनों सरकारों से अपील की है कि समाज में आपसी भाईचारा, कौमी एकता और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए धार्मिक व आस्था से जुड़े मुद्दों का राजनीतिक इस्तेमाल तुरंत बंद होना चाहिए। इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन और मांग के दौरान मुस्लिम सेवा संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी, युवा कार्यकर्ता और नमाजी बड़ी संख्या में मौजूद रहे, जिन्होंने समाज में शांति का संदेश देने का प्रयास किया।


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