उत्तराखंड में मतदाता महाअभियान का धमाकेदार आगाज: पहले ही दिन बांटे गए 4.90 लाख गणना पत्र
देहरादून। उत्तराखंड में लोकतंत्र की बुनियाद को और मजबूत करने के लिए सोमवार, 8 जून से 'विशेष गहन पुनरीक्षण' कार्यक्रम का प्रदेशव्यापी शंखनाद हो गया है। महाअभियान के पहले ही दिन निर्वाचन आयोग ने राज्य में मुस्तैदी की नई मिसाल पेश की है। अभियान के पहले ही दिन प्रदेशभर में रिकॉर्ड 4,90,252 गणना पत्रों का वितरण किया जा चुका है, जबकि 13,736 फॉर्म्स को तत्काल डिजिटलाइज्ड भी कर दिया गया। इस विशेष अभियान की शुरुआत उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पहला गणना फॉर्म सौंपकर की गई। इसके अलावा, भाजपा, कांग्रेस, भाकपा (एम) और बसपा जैसी तमाम मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के शीर्ष प्रदेश पदाधिकारियों को भी पहले दिन गणना फॉर्म बांटे गए।
उत्तराखंड राज्य में कुल 79,60,762 पंजीकृत मतदाता हैं। इन सभी वोटर्स को इस महाअभियान से जोड़ने के लिए निर्वाचन कार्यालय ने जमीन पर 11,732 बूथ लेवल ऑफिसर्स की भारी-भरकम फौज उतारी है। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो राज्य के प्रत्येक बीएलओ को औसतन 679 मतदाताओं से सीधा संपर्क साधना है। 8 जून से शुरू हुआ यह घर-घर संपर्क अभियान आगामी 7 जुलाई तक (पूरे एक महीने) चलेगा। पहले दिन की रफ्तार देखकर अधिकारी बेहद गदगद हैं, क्योंकि पहले दिन ही हर बीएलओ ने औसतन 42 गणना पत्र बांटकर अपनी सक्रियता साबित कर दी है। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि इस पूरे अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि घर आने वाले बीएलओ को मतदाताओं को अपनी तरफ से कोई भी दस्तावेज (डॉक्यूमेंट) नहीं सौंपना होगा। बीएलओ सिर्फ गणना फॉर्म वितरित करेंगे और उसे संकलित करेंगे। किसी भी प्रकार की शंका, शिकायत या जानकारी के लिए निर्वाचन आयोग ने जिला स्तर पर टोल-फ्री नंबर 1950 जारी किया है। इसके अलावा, राज्य स्तर पर भी मतदाता 1800 3300 1950 पर कॉल कर सीधी सहायता प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में सभी जिलों में अभियान की प्रगति बेहद शानदार है और जहां रफ्तार धीमी है, वहां तत्काल समीक्षा बैठकें करने के निर्देश दे दिए गए हैं। देश के अन्य राज्यों में पिछले साल एसआईआर के दौरान आई दिक्कतों को देखते हुए उत्तराखंड निर्वाचन विभाग ने इस बार अचूक रणनीति तैयार की है। कुल तैनात बीएलओ में से 9,595 यानी 82 फीसदी बीएलओ पूरी तरह से हाई-टेक ट्रेंड हैं, जिन्हें तीन बार विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है। डॉ. जोगदंडे ने आश्वस्त किया कि बीएलओ पर काम का कोई अतिरिक्त दबाव नहीं होगा, क्योंकि प्री-एसआईआर चरण में ही प्रदेश के 88% वोटर्स की डिजिटल मैपिंग पूरी की जा चुकी है। इसके अलावा, बीएलओ की तकनीकी मदद के लिए हर बूथ स्तर पर 'आईटी वॉलिंटियर्स' तैनात हैं और राजनीतिक दलों ने 'बूथ लेवल एजेंट' भी नामित किए हैं, जिससे कार्य बेहद सुगम हो जाएगा। आयोग का लक्ष्य शुरुआती 10 दिनों के भीतर शत-प्रतिशत फॉर्म बांटने का है। उत्तराखंड की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और जून-जुलाई में मानसून की दस्तक की संभावना को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने अपने फील्ड स्टाफ की सुरक्षा और सुविधा का पूरा ख्याल रखा है। सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बीएलओ की हरसंभव मदद करें। राज्य स्तर से सभी बीएलओ को एक विशेष 'किट बैग' दिया गया है। इसके साथ ही, ऐप इस्तेमाल करने में नेटवर्क की बाधा न आए, इसके लिए सभी बीएलओ के मोबाइल का एक महीने का रिचार्ज खर्च भी सरकार द्वारा अग्रिम भुगतान कर दिया गया है। यदि फील्ड में किसी अन्य संसाधन की जरूरत होती है, तो बीएलओ जिला स्तर पर सीधे मांग कर सकते हैं।