उत्तराखंड के श्रमिकों की बल्ले-बल्ले: अब 5 नहीं, मात्र 1 साल की नौकरी पर मिलेगी ग्रेच्युटी,पीएफ और बीमा का भी मिलेगा सुरक्षा कवच
उत्तराखंड सरकार प्रदेश के लाखों श्रमिकों के जीवन स्तर को सुधारने और उन्हें सामाजिक सुरक्षा का कानूनी कवच देने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्र सरकार की चार नई श्रम संहिताओं को राज्य में लागू करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसके तहत अब श्रमिकों को पांच साल के लंबे इंतजार के बजाय महज एक साल की सेवा पूरी करने पर ही 'ग्रेच्युटी' का लाभ मिल सकेगा। इसके साथ ही असंगठित क्षेत्र के मजदूरों और गिग वर्कर्स (जैसे जोमैटो, स्विगी और ओला-उबर पार्टनर) को पहली बार भविष्य निधि और बीमा जैसी सुविधाओं से जोड़ा जाएगा।
श्रम विभाग ने 'उत्तराखंड औद्योगिक संबंध संहिता नियमावली 2026' का ड्राफ्ट बृहस्पतिवार को आधिकारिक तौर पर जारी कर दिया है। विभाग ने इस पर जनता, उद्योगपतियों और श्रमिक संगठनों से 30 मई 2026 तक सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। सुझाव सचिव, श्रम विभाग को ई-मेल या डाक के माध्यम से भेजे जा सकते हैं। इससे पहले 'मजदूरी संहिता' का ड्राफ्ट भी जारी किया जा चुका है, जिसे जल्द ही कैबिनेट में पेश किया जाएगा। नई नियमावली लागू होने के बाद प्रदेश के हर श्रमिक के लिए एक समान न्यूनतम मजदूरी तय होगी। सबसे बड़ा बदलाव वेतन के ढांचे में होगा, जहाँ मूल वेतन कुल वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत अनिवार्य होगा। इसका सीधा लाभ श्रमिकों को मिलेगा, क्योंकि उनका पीएफ योगदान और रिटायरमेंट के समय मिलने वाली ग्रेच्युटी की राशि काफी बढ़ जाएगी। जो श्रमिक अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) पर काम करते हैं, उनके लिए अब एक साल की नौकरी के बाद ही ग्रेच्युटी का हकदार होना जीवन की बड़ी सुरक्षा साबित होगा। श्रमिकों के कल्याण के लिए सरकार ने स्वास्थ्य और सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी है। 40 वर्ष से अधिक आयु के श्रमिकों के लिए साल में एक बार मुफ्त स्वास्थ्य जांच अनिवार्य की जाएगी। महिला श्रमिक अब अपनी सहमति से रात की शिफ्ट में काम कर सकेंगी, लेकिन नियोक्ता को उनकी सुरक्षा और घर तक छोड़ने की पूरी जिम्मेदारी उठानी होगी। वेतन का भुगतान अब पूरी तरह डिजिटल माध्यम से होगा, जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और श्रमिकों को समय पर पैसा मिलेगा। श्रमायुक्त पीसी दुम्का ने बताया कि राज्य ने चारों संहिताओं (मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध और व्यावसायिक सुरक्षा) को पहले ही अपना लिया है। अब इनकी नियमावली तैयार की जा रही है ताकि इन्हें धरातल पर उतारना आसान हो सके। व्यावसायिक सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा संहिताओं के ड्राफ्ट भी जल्द ही सार्वजनिक किए जाएंगे। इस ऐतिहासिक बदलाव से न केवल औद्योगिक शांति बढ़ेगी, बल्कि राज्य के विकास की रीढ़ माने जाने वाले श्रमिकों का शोषण रुकेगा और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार मिलेगा।