मसूरी से देश के भावी प्रशासकों को ‘गुरुमंत्र’: उपराष्ट्रपति बोले-कुर्सी नहीं, फैसले तय करेंगे अधिकारी की पहचान
मसूरी। पहाड़ों की रानी मसूरी से देश की भावी प्रशासनिक व्यवस्था को उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सेवा, सुशासन और नैतिक नेतृत्व का ‘गुरुमंत्र’ दिया। लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) में वर्ष 2024 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी प्रशिक्षुओं के द्वितीय चरण के प्रशिक्षण के समापन समारोह में उन्होंने कहा कि ‘सेवाभाव और कर्तव्यबोध’ को अपने कार्य का मार्गदर्शक मंत्र बनाएं। उन्होंने युवा अधिकारियों से कहा कि प्रशासन का वास्तविक उद्देश्य सरकारी योजनाओं को कागजों से निकालकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि सिविल सेवक सरकार और जनता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। सरकार नीतियां बनाती है, लेकिन उनका वास्तविक असर जमीन पर कितना दिखाई देता है, यह काफी हद तक प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर निर्भर करता है। इसलिए अधिकारियों की जिम्मेदारी फाइलों और दफ्तरों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि योजनाओं का लाभ उन लोगों तक भी पहुंचे, जो व्यवस्था के सबसे दूर छोर पर हैं।
प्रशिक्षु अधिकारियों को नेतृत्व की कसौटी समझाते हुए सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि अधिकारी की पहचान उसकी कुर्सी या अधिकार से नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में लिए गए फैसलों से होती है। प्रशासनिक जीवन में कई ऐसे अवसर आएंगे, जब अधिकारियों को दबाव और चुनौतियों के बीच निर्णय लेना पड़ेगा। ऐसे समय में ईमानदारी, नैतिकता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान होगी। उन्होंने अधिकारियों को आगाह किया कि पद और अधिकार के साथ जिम्मेदारी भी आती है। निर्णय लेते समय व्यक्तिगत हित, दबाव या सुविधा के बजाय संविधान, कानून और जनता के हित को केंद्र में रखना चाहिए। यही दृष्टिकोण प्रशासन में जनता का विश्वास मजबूत करेगा। उपराष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों को टीम भावना के साथ काम करने की सीख दी। उन्होंने कहा कि प्रशासन किसी एक अधिकारी की क्षमता से नहीं, बल्कि पूरी टीम के सामूहिक प्रयास से बेहतर परिणाम देता है। व्यक्तिगत उपलब्धि से अधिक महत्वपूर्ण टीम की सफलता है। उन्होंने प्रशिक्षुओं से अपने सहयोगियों को प्रेरित करने, सकारात्मक कार्य वातावरण तैयार करने और पूर्व अधिकारियों द्वारा विकसित सफल कार्यप्रणालियों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उनका संदेश स्पष्ट था कि बेहतर प्रशासन के लिए नेतृत्व के साथ सहयोग और समन्वय भी उतना ही जरूरी है। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश की प्रगति तभी सार्थक मानी जाएगी, जब विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। विकास की प्रक्रिया समावेशी होनी चाहिए। उन्होंने युवा अधिकारियों से ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की समस्याओं को समझने तथा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देने को कहा। सीपी राधाकृष्णन ने 2024 बैच में महिलाओं की मजबूत भागीदारी को भी नारी शक्ति के बढ़ते प्रभाव का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस बैच में करीब 41 प्रतिशत अधिकारी महिलाएं हैं। यह बदलते भारत की तस्वीर पेश करता है। प्रतिभा अब रूढ़ियों की सीमाओं में बंधी नहीं है और महिलाएं प्रशासन समेत हर क्षेत्र में अपनी नई पहचान बना रही हैं। उपराष्ट्रपति ने प्रशिक्षु अधिकारियों को तकनीकी बदलावों के साथ कदमताल करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में प्रशासन को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और नागरिक केंद्रित बनाने में तकनीक की अहम भूमिका होगी। अधिकारियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण, मशीन लर्निंग और ब्लॉकचेन जैसी तकनीकों की समझ विकसित करनी चाहिए, ताकि इनका इस्तेमाल नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने में किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण समाप्त होने का अर्थ सीखने की प्रक्रिया का अंत नहीं है। सिविल सेवा में लगातार बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को अपडेट करना होगा। नई जानकारी हासिल करना, तकनीकी बदलाव समझना और सामाजिक परिवेश में हो रहे परिवर्तन को महसूस करना एक सफल प्रशासक की निरंतर जिम्मेदारी है। मसूरी की वादियों से देश के भावी प्रशासकों को दिया गया यह संदेश उनके प्रशासनिक सफर की दिशा तय करने वाला रहा। सेवाभाव, ईमानदारी, टीम भावना, तकनीकी दक्षता और नैतिक नेतृत्व को आधार बनाकर काम करने की सीख के साथ ये युवा अधिकारी आने वाले समय में देश के विभिन्न हिस्सों में महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालेंगे।