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हल्द्वानी अतिक्रमण:हाईकोर्ट के डिसीजन पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक!आगे कोई निर्माण न हो,पुनर्वास की योजना पर,मानवीय संवेदनाओं पर क्या कहा कोर्ट ने हर पॉइंट को जानिये

editor
  • Kanchan Verma
  • January 05, 2023 08:01 AM
Haldwani Encroachment: Supreme Court put a stay on High Court's decision! No further construction, on rehabilitation plan, what the court said on human sensibilities, know every point

हल्द्वानी रेलवे भूमि पर हुए अतिक्रमण मामले में आज जब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी थी तब सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले में मानवीय संवेदनाओं को देखते हुए फैसला सुना दिया है. सुनवाई करते हुए जज ने कहा, "हम रेलवे और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर रहे हैं. वहां और अधिक कब्जे पर रोक लगे. फिलहाल हम हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा रहे हैं।

जज ने आगे कहा कि एक महीने बाद अगली सुनवाई होगी. हल्द्वानी में अतिक्रमण पर अब रोक लगा दी गई है. 7 फरवरी को अगली सुनवाई होगी. सुनवाई करते हुए जस्टिस कौल ने पूछा कि उत्तराखंड सरकार के वकील कौन हैं? कितनी जमीन रेलवे की है, कितनी राज्य की? क्या वहां रह रहे लोगों का दावा लंबित है? जज ने आगे कहा, "इनका दावा है कि बरसों से रह रहे हैं. यह ठीक है कि उस जगह को विकसित किया जाना है, लेकिन उनका पुनर्वास होना चाहिए

याचिकाकर्ता पक्ष के वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कोर्ट को बताया कि पहले रेलवे ने 29 एकड़ कहा, लेकिन फिर 78 एकड़ कहने लगा. एएसजी ने कहा कि इन लोगों ने कभी पुनर्वास का अनुरोध नहीं किया और यह जमीन को ही अपना बताते हैं. सुनवाई करते हुए जस्टिस ओका ने कहा, "ठीक है हाई कोर्ट ने आदेश दिया, लेकिन किसी ऑथोरिटी को इन लोगों की बातें सुनकर निपटारा करना चाहिए."


जस्टिस कौल ने कहा, "2 तरह के लोग हो सकते हैं- एक जिनका दावा बनता है, एक जिनका कोई दावा नहीं बनता. आपको जमीन को कब्ज़े में लेकर विकसित करने का हक है, लेकिन सबको सुनकर बीच का रास्ता निकालना चाहिए."याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ वकील कोलिन ने बहस की शुरुआत की. उन्होंने शीर्ष अदालत के सामने नैनीताल हाई कोर्ट के आदेश को पढ़ा और कहा कि वहां पक्के निर्माण हैं, स्कूल और कॉलेज हैं.कोर्ट ने पूछा कि जिन लोगों ने नीलामी में लैंड खरीदा है, उसे आप कैसे डील करेंगे? लोग 50/60 वर्षों से वहां रह रहे हैं. उनके पुनर्वास की कोई योजना तो होनी चाहिए.


ऐश्वर्या भाटी रेलवे के लिए पेश हुईं. उन्होंने कहा कि यह सबकुछ रातोंरात नहीं हुआ है और पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन हुआ है. वहीं जस्टिस कौल ने कहा, "लेकिन मानवीय आधार पर मामला देखना चाहिए, तब तक सुनिश्चित करें कि और कोई निर्माण न हो." जज ने ये भी कहा कि आप पैरामिलिट्री फोर्स की मदद लेकर 1 हफ्ते में खाली करवाना चाहते हैं. इस पर विचार कीजिए.ऐश्वर्या भाटी से कहा, ‘ऐसा नही है कि आप विकास के लिए अतिक्रमण हटा रहे हैं. आप सिर्फ अतिक्रमण हटा रहे हैं.’ रेलवे ने अपने जवाब में कहा, ‘यह फैसला रातों-रात नही हुआ. नियमों का पालन हुआ है. यह मामला अवैध खनन से शुरू हुआ था.’ याचिकाकर्ताओं के वकील कोलिन ने कहा, ‘लैंड का बड़ा हिस्सा राज्य सरकार का है. रेलवे की भूमि कम है.’ जस्टिस कौल ने कहा, ‘हमें इस मामले को सुलझाने के लिए तर्कसंगत दृष्टिकोण अपनाना होगा. कुछ लोगों के पास 1947 से पहले के भी पट्टे हैं. याचिकाकर्ताओं के वकील ने बताया कि इस मामले में कुछ लोगों ने नीलामी में जमीनें खरीदी हैं. लोगों से 7 दिनों में भूमि खाली कराने का फैसला सही नहीं है.


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