इंडस्ट्रियल हब बना हरिद्वार: 2900 करोड़ का रिकॉर्ड निवेश, 23000 से अधिक युवाओं को मिलेगा रोजगार
हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार अब केवल अध्यात्म का केंद्र ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के औद्योगिक विकास का सबसे बड़ा इंजन बनकर उभरा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 हरिद्वार के लिए 'रोजगार का साल' साबित होने जा रहा है। जिले में 2,946 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को हरी झंडी मिल चुकी है, जिससे आगामी वर्षों में 23,212 नए रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है। यह आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि हरिद्वार राज्य का प्रमुख इंडस्ट्रियल हब बन चुका है। जिला उद्योग केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक, इस वर्ष आए 364 निवेश प्रस्तावों में से महज एक को छोड़कर बाकी सभी को मंजूरी दे दी गई है। यही नहीं, नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में भी 107 करोड़ के 18 प्रस्तावों को मंजूरी मिल चुकी है, जिससे 801 लोगों को काम मिलेगा। साल 2016 से अब तक हरिद्वार में 15,011 करोड़ रुपये का कुल निवेश आ चुका है, जो एक लाख से अधिक लोगों को आजीविका प्रदान कर रहा है।
हरिद्वार के औद्योगिक विकास में फार्मा, ऑटोमोबाइल और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर का दबदबा है। जिले का मजबूत आधार होने के कारण अब कई कंपनियां एपीआई और एक्सपोर्ट ओरिएंटेड यूनिट लगा रही हैं। ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में नई कंपनियां आ रही हैं, जो खासतौर पर इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के पार्ट्स और असेंबलिंग पर ध्यान केंद्रित करेंगी। फल-सब्जी आधारित यूनिट्स और पर्यावरण अनुकूल प्लास्टिक पैकेजिंग पर जोर दिया जा रहा है। सरकार की 'सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम' नीति ने निवेश की राह को बेहद आसान बना दिया है। अब प्रस्तावों की मंजूरी कुछ ही हफ्तों में मिल जाती है। जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक उत्तम कुमार तिवारी के अनुसार, 'राज्य सरकार की एमएसएमई पॉलिसी-2023' और 'मेगा इंडस्ट्रियल पॉलिसी-2025' के तहत निवेशकों को स्टाम्प ड्यूटी में छूट और कैपिटल सब्सिडी जैसे लाभ दिए जा रहे हैं। इस बड़े निवेश का सीधा लाभ स्थानीय एमएसएमई सेक्टर को मिलेगा। बड़ी कंपनियों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से काम देने के लिए छोटे उद्योगों की जरूरत होगी। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को कौशल विकास प्रशिक्षण देकर इन उद्योगों के लिए तैयार किया जा रहा है। दिल्ली-एनसीआर से बेहतर कनेक्टिविटी और कुशल श्रमबल की उपलब्धता ने हरिद्वार को वैश्विक निवेशकों की नजर में और भी आकर्षक बना दिया है। धर्मनगरी के रूप में विख्यात हरिद्वार अब औद्योगिक क्रांति की नई गाथा लिख रहा है। पारदर्शी सिस्टम और सरकार की प्रोत्साहन नीतियों के चलते यह न केवल उत्तराखंड, बल्कि पूरे उत्तर भारत का एक प्रमुख विनिर्माण केंद्र बनने की राह पर है।