उत्तरकाशी में हाहाकार: तड़के पिरूल प्लांट में भड़की भीषण आग, आसमान में उठीं लपटें, दमकल विभाग ने बमुश्किल टाला बड़ा हादसा
उत्तरकाशी। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में वनाग्नि और शॉर्ट सर्किट के खतरों के बीच सोमवार तड़के एक बड़ा हादसा सामने आया। उत्तरकाशी के ग्राम चकोन स्थित महावीर गंगाडी के पिरूल (चीड़ की पत्तियां) प्लांट में तड़के भीषण आग लगने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप और अफरा-तफरी मच गई। घटना सुबह लगभग 3:30 बजे की है, जब पूरा इलाका गहरी नींद में सोया हुआ था। पिरूल के अत्यधिक ज्वलनशील होने के कारण आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते पूरे प्लांट को अपनी चपेट में ले लिया। आसमान में दूर-दूर तक धुएं का गुबार और लाल लपटें दिखाई देने लगीं।
सूचना मिलते ही फायर सर्विस की टीम तुरंत एक्शन में आई और दो दमकल वाहनों के साथ मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। फायर ब्रिगेड के जवानों ने कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद बमुश्किल आग पर काबू पाया। मशीनें और पिरूल पाउडर जलकर स्वाहा, लाखों के नुकसान की आशंका आपदा कंट्रोल रूम से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस अग्निकांड में प्लांट को भारी नुकसान पहुंचा है। आग की चपेट में आने से प्लांट के भीतर स्थापित एक कीमती मशीन, बड़ी मात्रा में तैयार करके रखा गया पिरूल पाउडर और अन्य सहायक सामान पूरी तरह जलकर राख हो गया है। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक, घटना से प्लांट संचालक को भारी आर्थिक क्षति पहुंची है। हालांकि, इस पूरे डरावने हादसे में सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि समय रहते कदम उठाने से किसी भी प्रकार की जनहानि या पशुहानि नहीं हुई। आग की गंभीरता और पिरूल की प्रकृति को देखते हुए मौके पर प्रशासन और फायर विभाग की टीमें लगातार तैनात रहीं और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आने तक नजर बनाए रखी। आपदा प्रबंधन अधिकारी का बयान: आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल गुसांई ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार सुबह चकोन स्थित पिरूल प्लांट में आग लगने की सूचना मिलते ही बिना वक्त गंवाए फायर विभाग की टीम को रवाना किया गया था। टीम ने सूझबूझ से समय रहते आग को चारों तरफ से घेरकर नियंत्रित कर लिया। घटना में कोई हताहत नहीं हुआ है। आग लगने के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए जांच के आदेश दे दिए गए हैं। प्राथमिक जांच में अभी आग लगने का कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन विशेषज्ञों और पुलिस की आशंका है कि इसके पीछे बिजली का शॉर्ट सर्किट या फिर प्लांट में एकत्र सूखी और ज्वलनशील सामग्री में किसी चिंगारी का लगना हो सकता है। फिलहाल राजस्व और प्रशासन की टीम नुकसान के आकलन और कारणों की विस्तृत जांच में जुटी है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह हादसा बेहद डरावना था। पिरूल प्लांट के आसपास रिहायशी इलाका और पेड़-पौधे होने के कारण खतरा दोगुना था। लोगों का कहना है कि यदि दमकल विभाग की गाड़ियां समय पर नहीं पहुंचतीं और आग पर तुरंत काबू नहीं पाया जाता, तो यह तेजी से आसपास के घरों और जंगलों तक फैल सकती थी, जिससे भारी तबाही मच जाती। घटना के बाद काफी देर तक पूरे चकोन गांव में दहशत और तनाव का माहौल बना रहा। वहीं, स्थानीय जनता ने विपरीत परिस्थितियों में भी त्वरित कार्रवाई करने के लिए फायर सर्विस की टीम की पीठ थपथपाई है और उनकी बहादुरी की जमकर सराहना की है। उत्तराखंड के इन पहाड़ी क्षेत्रों में गर्मियों की शुरुआत के साथ ही पिरूल और सूखी पत्तियों में आग लगने की घटनाएं चुनौती बन जाती हैं, ऐसे में यह घटना सुरक्षा इंतजामों को लेकर एक बड़ी चेतावनी भी है।