• Home
  • News
  • Hearing on citizenship of illegal immigrants will be held in Supreme Court on October 17

अवैध प्रवासियों की नागरिकता पर सुप्रीम कोर्ट में 17 अक्तूबर को होगी सुनवाई 

editor
  • Tapas Vishwas
  • September 20, 2023 10:09 AM
Hearing on citizenship of illegal immigrants will be held in Supreme Court on October 17

असम में अवैध प्रवासियों से संबंधित मामले में उच्चतम न्यायलय ने बुधवार को कहा कि वह इससे संबंधित नागरिकता अधिनियम की धारा 6ए की संवैधानिक वैधता की जांच के लिए 17 अक्तूबर को सुनवाई शुरू करेगा। नागरिकता अधिनियम में धारा 6ए को असम समझौते के अंतर्गत आने वाले लोगों की नागरिकता से निपटने के लिए एक विशेष प्रावधान के रूप में जोड़ा गया था।

इस प्रावधान के तहत जो लोग 1985 में संशोधित नागरिकता अधिनियम के अनुसार 1 जनवरी 1966 को या उसके बाद लेकिन 25 मार्च 1971 से पहले बांग्लादेश सहित निर्दिष्ट क्षेत्रों से असम आए हैं और तब से असम के निवासी हैं। नागरिकता के लिए उन्हें धारा 18 के तहत खुद को पंजीकृत करना होगा। परिणामस्वरूप असम में बांग्लादेशी प्रवासियों को नागरिकता देने की कट-ऑफ तारीख 25 मार्च, 1971 तय करने का प्रावधान है। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा कि नोडल वकीलों ने मामले में सामान्य संकलन तैयार किया है। हालांकि इसको सुव्यवस्थित करने की आवश्यकता है। पीठ में शामिल जस्टिस एएस बोपन्ना, एमएम सुंदरेश, जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा ने बताया कि एक सामान्य सूचकांक तैयार किया जाएगा। सामान्य संकलन की सॉफ्ट कॉपी अक्तूबर तक तैयार की जाएगी। लिखित प्रस्तुतियां 10 अक्तूबर तक दायर की जाएंगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि कार्यवाही का शीर्षक नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 6ए में होगा। केस लड़ने वाले पक्षों के वकील से शीर्ष अदालत ने  13 दिसंबर को असम में अवैध प्रवासियों से संबंधित नागरिकता अधिनियम की धारा 6 ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह में निर्णय के लिए मुद्दों पर पूछताछ की थी। पीठ ने कहा था कि वकील इस अदालत के समक्ष निर्णय के लिए आने वाले मामलों को अलग-अलग श्रेणियों और जिस क्रम में दलीलें दी जानी हैं, में अलग कर देंगे, हम इसे निर्देशों के लिए रखेंगे। शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री को पीठ ने इस मुद्दे पर दायर याचिकाओं के पूरे सेट की स्कैनिंग की सॉफ्ट प्रतियां उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। इस मुद्दे पर 2009 में असम पब्लिक वर्क्स द्वारा दायर याचिका समेत 17 याचिकाएं शीर्ष अदालत में लंबित हैं। विदेशियों का पता लगाने और उन्हें निर्वासित करने के लिए 15 अगस्त, 1985 को ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन, असम सरकार और भारत सरकार द्वारा हस्ताक्षरित असम समझौते के तहत, असम में स्थानांतरित हुए लोगों को नागरिकता प्रदान करने के लिए नागरिकता अधिनियम में धारा 6 ए शामिल की गई थी। गुवाहाटी स्थित एक एनजीओ ने 2012 में धारा 6ए को चुनौती देते हुए इसे मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताया और दावा किया कि यह असम में अवैध प्रवासियों को नियमित करने के लिए अलग-अलग तारीखें देता है। दो जजों की बेंच ने 2014 में इस मामले को संविधान पीठ के पास भेज दिया था।
 


संबंधित आलेख: