ईरान युद्ध की तपिश: पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 महंगा, निजी तेल कंपनी 'नायरा एनर्जी' ने बढ़ाए दाम
देहरादून। ईरान-इजराइल युद्ध के बीच भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा उछाल आ गया है। देश की सबसे बड़ी निजी ईंधन रिटेलर कंपनी नायरा एनर्जी ने गुरुवार को पेट्रोल की कीमत 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दी। इससे आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
सूत्रों के अनुसार, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के बाद तेहरान की जवाबी कार्रवाई से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई। इसके बावजूद भारत में पिछले कई महीनों से पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतें स्थिर थीं। अब नायरा एनर्जी ने इनपुट लागत में हुई बढ़ोतरी का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं पर डालने का फैसला किया है। नायरा एनर्जी पूरे देश में 6,967 पेट्रोल पंप संचालित करती है। कंपनी के इस कदम से पेट्रोल की कीमत कुछ राज्यों में 5.30 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकती है। हालांकि नायरा के प्रवक्ता ने इस बढ़ोतरी पर अभी कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। रिलायंस इंडस्ट्रीज और बीपी का जॉइंट वेंचर जियो-बीपी (2,185 पंप) अभी तक कीमतें नहीं बढ़ाया है, जबकि सरकारी कंपनियां IOC, BPCL और HPCL का बाजार पर लगभग 90 प्रतिशत नियंत्रण है और उन्होंने अभी भी दरें फ्रीज रखी हैं। निजी कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बावजूद रिटेल कीमतें स्थिर रखने से उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। सरकारी कंपनियों को ‘‘अच्छे कॉर्पोरेट नागरिक’’ के रूप में काम करने के लिए कुछ समर्थन मिलता है, लेकिन निजी कंपनियों को नुकसान की भरपाई के लिए कोई मुआवजा नहीं मिलता। ऐसे में उनके पास कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। गौरतलब है कि अप्रैल 2022 से आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतें लगभग स्थिर थीं। हालांकि पिछले हफ्ते सरकारी कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल की कीमत 2 रुपये प्रति लीटर और औद्योगिक उपयोग के बल्क डीजल की कीमत 22 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ा दी थी। ईंधन कीमतों में इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम आदमी, परिवहन, कृषि और उद्योग क्षेत्र पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारी कंपनियां भी कीमतें बढ़ाती हैं तो पेट्रोल-डीजल और महंगा हो सकता है। मिडिल ईस्ट में बिगड़ती स्थिति के कारण वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश में ईंधन कीमतों में उछाल महंगाई को और बढ़ावा दे सकता है। नायरा एनर्जी के इस फैसले के बाद अब नजरें सरकारी तेल कंपनियों पर टिकी हुई हैं। यदि वे भी कीमतें बढ़ाती हैं तो आम उपभोक्ताओं पर दोहरी मार पड़ेगी। फिलहाल उपभोक्ता इस बढ़ोतरी से बचने के लिए वैकल्पिक ईंधन और ईंधन बचत के उपायों पर विचार कर रहे हैं।