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उत्तराखंड में हैलीपैड और हैलीपोर्ट नीति को मिली मंजूरी! बढ़ेगा रोजगार, आम जनता को मिलेगा फायदा

editor
  • Tapas Vishwas
  • December 04, 2023 01:12 PM
Helipad and heliport policy approved in Uttarakhand! Employment will increase, general public will benefit

धानी कैबिनेट में हैलीपैड और हैलीपोर्ट नीति को मंजूरी मिल गई है। हैलीपैड और हैलीपोर्ट नीति को मंजूरी मिलने से जनता को बड़ा फायदा मिलेगा। इस नीति को मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश की तमाम खूबसूरत वादियों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाने में भी हैलीपैड और हैलीपोर्ट काफी कारगर साबित होंगे। 

उत्तराखंड में विषम भौगोलिक परिस्थितियों के चलते आपदा जैसे हालात बनते रहते रहते हैं। ऐसे में किसी आपदा के दौरान राहत बचाव कार्यों के लिए हैलीपैड और हैलीपोर्ट की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाने में भी हैलीपैड और हैलीपोर्ट काफी कारगर साबित हो सकते हैं। यही वजह है कि प्रदेश में हैलीपैड और हैलीपोर्ट की संभावनाओं को देखते हुए सरकार प्रदेश में हेली नेटवर्क का जाल बिछाना चाहती है। जिसके तहत नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण ने 'उत्तराखण्ड हैलीपैड एवं हैलीपोर्ट नीति 2023' तैयार की है. जिसे धामी मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। इस नीति के तहत आम जनता भी हैलीपैड और हैलीपोर्ट बना सकेगी। इस नीति में दो विकल्प रखे गए हैं. पहले विकल्प के तहत, जिसके पास करीब 1000 वर्ग मीटर या फिर करीब 4000 वर्ग मीटर की भूमि है वो अपनी भूमि को हैलीपैड या हैलीपोर्ट बनाने के लिए प्राधिकरण को 15 साल के लिए पट्टे पर भूमि दे सकते हैं। जिस पर प्राधिकरण हैलीपैड / हैलीपोर्ट बनाया जाएगा। जिसके अनुसार भूमि मालिक को हर साल 100 रुपए प्रति वर्ग मीटर के अनुसार किराया या फिर प्राप्त होने वाले राजस्व का 50 प्रतिशत हिस्सा दिया जाएगा। दूसरे विकल्प के तहत, जिसके पास भूमि है वो प्राधिकरण के साथ 10 साल का एग्रीमेंट कर खुद सारा खर्च वहन कर हैलीपैड/हैलीपोर्ट को विकसित कर सकता है। ऐसे में आने वाले सभी खर्च पर, राज्य सरकार 50 फीसदी पूंजीगत सब्सिडी देगी. साथ ही उस हैलीपैड / हैलीपोर्ट से होने वाला सभी इनकम भूस्वामी का होगा। नागरिक उड्डयन विभाग के अपर सचिव सी रविशंकर ने बताया हैलीपैड बनाने के लिए करीब 10 से 20 लाख और हैलीपोर्ट के लिए करीब 2 से 3 करोड़ का व्यय होगा। आपदा के दृष्टिगत यह काफी महत्वपूर्ण साबित होगा. उन्होंने कहा उत्तराखंड में तमाम क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर हैलीपैड / हैलीपोर्ट नहीं हैं जिसके चलते तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस नीति को मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश में हेली नेटवर्क का जाल बिछाया जा सकता है। 


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