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नैनीताल की बदहाल सड़कों पर हाईकोर्ट सख्त, दो सप्ताह में मरम्मत कर रिपोर्ट देने के आदेश

editor
  • Tapas Vishwas
  • March 11, 2026 01:03 PM
High Court strict on the dilapidated roads of Nainital, orders to repair them and submit a report within two weeks.

नैनीताल जिले की खराब सड़कों और पर्यावरण के साथ हो रहे कथित खिलवाड़ को लेकर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जिला प्रशासन को दो सप्ताह के भीतर नैनीताल-हल्द्वानी और नैनीताल-भवाली मार्ग की स्थिति सुधारने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अदालत ने तय समय में कार्य पूरा कर प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई के लिए दो सप्ताह बाद की तिथि निर्धारित की गई है। यह जनहित याचिका अनिल यादव की ओर से उच्च न्यायालय में दायर की गई है, जिसमें नैनीताल जिले के पर्वतीय मार्गों पर सुरक्षा मानकों के उल्लंघन और अवैध डंपिंग के कारण पैदा हो रहे खतरे को उजागर किया गया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि निर्माण कार्यों का मलबा सड़कों के किनारे और खतरनाक मोड़ों पर फेंका जा रहा है, जिससे पर्यावरण और यातायात दोनों पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता डी.सी.एस. रावत ने अदालत को बताया कि हल्द्वानी-नैनीताल, कालाढूंगी और भवाली-कैंची धाम जैसे व्यस्त मार्गों पर निर्माण कार्यों का मलबा जानबूझकर तीखे मोड़ों और ब्लाइंड टर्न्स पर डंप किया जा रहा है। इससे न केवल यातायात बाधित हो रहा है, बल्कि बरसात के दौरान सड़क पर फिसलन बढ़ने से दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। याचिका में यह भी कहा गया है कि कई स्थानों पर सुरक्षा दीवारें और क्रैश बैरियर नहीं हैं, जिससे स्थानीय लोगों, स्कूली बच्चों और पर्यटकों की जान जोखिम में रहती है। पर्वतीय क्षेत्र होने के कारण यहां सड़क सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी है, लेकिन कई जगहों पर इन मानकों की अनदेखी की जा रही है। हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए जिला प्रशासन को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि सड़कों की मरम्मत, सुरक्षा व्यवस्था और मलबा हटाने जैसे कार्यों की प्रगति रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर पेश की जाए। अदालत के इस आदेश के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी नजरें टिक गई हैं। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते सड़कों की हालत नहीं सुधारी गई तो यह न केवल पर्यावरण बल्कि आम लोगों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है।


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