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दुमका में हाई-प्रोफाइल रेड: शिबू सोरेन के पूर्व पीएस के भतीजे के घर वन विभाग का छापा; भारी पुलिस बल के साथ आईएफएस अधिकारी ने डाला डेरा

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 18, 2026 01:07 PM
High-profile raid in Dumka: Forest Department raids the home of Shibu Soren's former PS's nephew; IFS officer camps at the site with a heavy police force.

दुमका। झारखंड की उपराजधानी दुमका के महुआडंगाल इलाके में शनिवार सुबह उस वक्त भारी हड़कंप मच गया, जब वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने झामुमो के संस्थापक व दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पूर्व पर्सनल सेक्रेटरी विवेक रावत के भतीजे पंकज रावत के आवास पर अचानक धावा बोल दिया। एक प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारी के नेतृत्व में हुई इस औचक छापेमारी के दौरान पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया। हाई-प्रोफाइल नाम जुड़े होने के कारण इस कार्रवाई से पूरे प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारे में सरगर्मी तेज हो गई है।

जानकारी के अनुसार, शनिवार तड़के वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम गाड़ियों के काफिले के साथ महुआडंगाल पहुंची। टीम की मुस्तैदी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसमें 20 से 25 फॉरेस्ट गार्ड, महिला पुलिसकर्मी, नगर थाना और मुफस्सिल थाना की भारी पुलिस फोर्स शामिल थी। सुरक्षा बलों ने सबसे पहले पंकज रावत के पूरे घर को चारों तरफ से घेर लिया ताकि कोई बाहर न आ-जा सके। इसके बाद टीम ने घर के अंदर प्रवेश कर सघन तलाशी अभियान (सर्च ऑपरेशन) शुरू किया। घर के चप्पे-चप्पे और विभिन्न हिस्सों की बारीकी से की गई यह जांच कई घंटों तक लगातार जारी रही। इस बड़ी कार्रवाई को लेकर वन विभाग और पुलिस के आला अधिकारियों ने पूरी तरह से रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है। छापेमारी किस उद्देश्य से की गई, मामला वन्य जीवों से जुड़ा था या वन भूमि अथवा अवैध लकड़ियों से इस संबंध में किसी भी अधिकारी ने कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है। इधर, घंटों चले सर्च अभियान के खत्म होने के बाद एक नया मोड़ तब आया, जब स्थानीय लोगों और परिजनों ने अधिकारियों को घेर लिया। ग्रामीणों ने अधिकारियों से मौके पर ही लिखित रूप में यह प्रमाणित करने की मांग की कि जांच के दौरान घर से कोई भी आपत्तिजनक या अवैध सामग्री बरामद नहीं हुई है। हालांकि, अधिकारियों ने इस मांग पर भी कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की और वहां से रवाना हो गए। चूंकि वन विभाग और पुलिस प्रशासन की ओर से अब तक इस छापेमारी के कारणों या जांच के आधार का कोई खुलासा नहीं किया गया है, इसलिए पूरे महुआडंगाल और दुमका क्षेत्र में तरह-तरह की राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चाएं तेज हैं। लोग इस गुप्त कार्रवाई के पीछे के वास्तविक कारणों को जानने के लिए उत्सुक हैं, लेकिन फिलहाल विभाग के आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है।


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