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हरिद्वार जिला योजना की बैठक में हाईवोल्टेज ड्रामा: विधायकों ने प्रभारी मंत्री के सामने फेंकी फाइल, 'वॉकआउट' कर धरने पर बैठे

editor
  • Tapas Vishwas
  • April 29, 2026 12:04 PM
High-Voltage Drama at Haridwar District Planning Meeting: MLAs Hurl Files at Minister-in-Charge, Stage 'Walkout' and Sit-in Protest

हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में आज जिला योजना की बैठक विकास चर्चा के बजाय हंगामे की भेंट चढ़ गई। जिला प्रभारी मंत्री सतपाल महाराज की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब विपक्षी विधायकों ने अपने क्षेत्रों के प्रस्तावों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए सदन का बहिष्कार कर दिया। भारी शोर-शराबे के बीच कांग्रेस और बसपा के छह विधायकों ने एजेंडे की फाइलें हवा में उछाल दीं और बैठक छोड़कर बाहर निकल गए।

बैठक शुरू होते ही बसपा विधायक मोहम्मद शहजाद और कांग्रेस के पांच अन्य विधायकों ने एजेंडे पर सवाल उठाए। विधायकों का सीधा आरोप था कि अधिकारी केवल ठेकेदारों के मनमाफिक प्रस्तावों को ही मंजूरी दे रहे हैं, जबकि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के प्रस्तावों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया है। बसपा विधायक मोहम्मद शहजाद ने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा, "पूरे जिले को ठेकेदार और अधिकारी मिलकर चला रहे हैं। जब हमारे द्वारा दिए गए विकास कार्यों के प्रस्तावों की कोई अहमियत ही नहीं है, तो हमारा इस बैठक में बैठने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। मंत्री सतपाल महाराज और जिला प्रशासन ने नाराज विधायकों को मनाने और शांत करने की कोशिश की, लेकिन आक्रोशित विधायक "पक्षपात" का आरोप लगाते हुए हॉल से बाहर निकल गए। इसके बाद विधायक रवि बहादुर, अनुपमा रावत, फुरकान अहमद, ममता राकेश, वीरेंद्र जाति और मोहम्मद शहजाद ने बैठक हॉल के बाहर ही जमीन पर बैठकर धरना शुरू कर दिया और सरकार व प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वही कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत ने भी गंभीर आरोप लगते हुए कहा कि मेरे क्षेत्र के 84 गांवों की बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी समस्याओं के प्रस्ताव शामिल नहीं किए गए। जनप्रतिनिधियों की आवाज दबाई जा रही है। विकास कार्यों में विपक्ष के साथ भेदभाव लोकतंत्र के खिलाफ है। जिला योजना की गरिमा को ठेकेदारों के हाथ गिरवी रख दिया गया है। दूसरी ओर, प्रभारी मंत्री सतपाल महाराज ने विधायकों के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि बैठक में सभी क्षेत्रों के न्यायसंगत प्रस्तावों को शामिल किया गया था। महाराज ने कहा, "विपक्ष केवल राजनीति करने के लिए हंगामा कर रहा है। हमने बार-बार उनसे चर्चा में बैठने का आग्रह किया, लेकिन वे सुनने को तैयार नहीं थे। यह सब पूर्व नियोजित विरोध जैसा था, जिसे वीडियो रिकॉर्डिंग में भी देखा जा सकता है। इस हंगामे के कारण जिले के करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की रूपरेखा पर फिलहाल विवाद के बादल मंडरा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के बजाय उन कामों को प्राथमिकता दी जा रही है जिनमें 'कमीशन' का खेल आसान हो। अब देखना होगा कि शासन इस गतिरोध को दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है।


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