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भारत-नेपाल बॉर्डर पर हाई वोल्टेज ड्रामा: बिना डेथ सर्टिफिकेट शव ले जा रहे थे नेपाली नागरिक, एसएसबी ने झूलापुल पर रोका

editor
  • Tapas Vishwas
  • April 13, 2026 08:04 AM
High-Voltage Drama at India-Nepal Border: Nepali Citizens Attempt to Transport Body Without Death Certificate; SSB Intercepts Them at Suspension Bridge

पिथौरागढ़। उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में भारत-नेपाल सीमा पर रविवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवानों ने एक एम्बुलेंस में ले जाए जा रहे शव को अंतरराष्ट्रीय झूलापुल पर रोक लिया। मामले में मृत्यु प्रमाण पत्र और आवश्यक कानूनी दस्तावेजों की कमी के कारण पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को मामला संदिग्ध लगा। अंततः शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेजा गया है।

जानकारी के अनुसार, रविवार सुबह करीब पांच नेपाली नागरिक एक एम्बुलेंस के जरिए शव को लेकर नेपाल जाने के लिए झूलाघाट स्थित अंतरराष्ट्रीय पुल पर पहुंचे। अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत जब ड्यूटी पर तैनात एसएसबी जवानों ने शव से संबंधित मृत्यु प्रमाण पत्र और अस्पताल के दस्तावेज मांगे, तो एम्बुलेंस में सवार लोग कोई भी वैध कागज नहीं दिखा सके। सुरक्षा के लिहाज से इसे गंभीर चूक मानते हुए एसएसबी ने तत्काल इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी और सीमा पार जाने पर रोक लगा दी। सूचना मिलते ही झूलाघाट कोतवाली के प्रभारी संजीव कुमार टीम के साथ मौके पर पहुंचे। शव ले जा रहे मनोज लुहार ने पूछताछ में बताया कि मृतक की पहचान पदम लुहार (48 वर्ष), निवासी बैतड़ी (नेपाल) के रूप में हुई है। पदम पिछले कई वर्षों से पिथौरागढ़ के टकाना क्षेत्र में रहकर मेहनत-मजदूरी करता था। परिजनों के अनुसार, शनिवार रात बाथरूम में फिसलने के कारण पदम के सिर पर गंभीर चोट लगी थी। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। रात भर शव जिला अस्पताल की मोर्चरी में रहा, लेकिन रविवार सुबह परिजन और साथी मजदूर पुलिस को सूचना दिए बिना और कानूनी औपचारिकताएं पूरी किए बिना ही शव लेकर बॉर्डर की ओर निकल पड़े। झूलाघाट कोतवाल संजीव कुमार ने बताया कि बिना पोस्टमार्टम और मृत्यु प्रमाण पत्र के किसी भी शव को अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कराने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा, "शव ले जा रहे लोगों के पास कोई भी आधिकारिक दस्तावेज नहीं था। हमने शव का पंचनामा भरकर उसे पिथौरागढ़ मोर्चरी भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और मौत के असली कारणों की पुष्टि होने के बाद ही शव को नेपाल जाने की अनुमति दी जाएगी। गौरतलब है कि उत्तराखंड के सीमावर्ती जिले विशेषकर पिथौरागढ़, चम्पावत और उत्तरकाशी में बड़ी संख्या में नेपाली नागरिक रोजी-रोटी की तलाश में रहते हैं। निर्माण कार्यों, कृषि और पर्यटन मार्गों पर ये मजदूर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पिथौरागढ़ मुख्यालय में इनकी अच्छी-खासी संख्या है। लेकिन अक्सर जानकारी के अभाव में ये लोग कानूनी औपचारिकताओं को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे इस तरह की स्थितियां पैदा होती हैं। झूलाघाट बॉर्डर पर हुई इस कार्रवाई ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों की मुस्तैदी को साबित किया है। बिना कागजी कार्रवाई के शव को ले जाना न केवल सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह किसी भी संभावित आपराधिक मामले को छिपाने का जरिया भी हो सकता है। फिलहाल पुलिस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है।
 


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