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देहरादून में हाई-वोल्टेज सियासी ड्रामा: परेड ग्राउंड नहीं,अब बन्नू स्कूल मैदान में होगी राहुल गांधी की रैली, पुलिस-कांग्रेसियों में भारी नोकझोंक

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 15, 2026 06:07 AM
High-voltage political drama in Dehradun: Rahul Gandhi's rally to be held at Bannu School ground instead of Parade Ground; heated exchange between police and Congress workers.

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में मंगलवार की देर रात उस वक्त भारी सियासी ड्रामा देखने को मिला, जब प्रशासन ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की 17 जुलाई को होने वाली 'छात्रों की गूंज' रैली की अनुमति अचानक निरस्त कर दी। देहरादून पुलिस और प्रशासन द्वारा परेड ग्राउंड में कार्यक्रम की दी गई इजाजत वापस लिए जाने के बाद देर रात राजधानी छावनी में तब्दील हो गई। पुलिस के साथ हुई तीखी नोकझोंक, भारी हंगामे और बैरिकेड्स तोड़े जाने के बाद आखिरकार कांग्रेस ने अपना रुख बदला है। अब राहुल गांधी का यह बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम परेड ग्राउंड के बजाय देहरादून के बन्नू स्कूल मैदान में आयोजित किया जाएगा। देर रात ही परेड ग्राउंड से टेंट और स्टेज के सामान से लदे ट्रकों को बन्नू स्कूल मैदान के लिए रवाना कर दिया गया। 14 जुलाई की शाम जैसे ही प्रशासन ने परेड ग्राउंड में कार्यक्रम की अनुमति कैंसिल कर कांग्रेस को बन्नू स्कूल मैदान का सुझाव दिया, कांग्रेस खेमे में उबाल आ गया। रात में ही प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, प्रीतम सिंह और हरक सिंह रावत समेत तमाम दिग्गज नेता और सैकड़ों कार्यकर्ता कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में एकत्र हुए और वहां से परेड ग्राउंड की ओर कूच कर दिया।

इसकी भनक लगते ही पुलिस प्रशासन ने पहले ही भारी बैरिकेडिंग कर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया था। लेकिन आक्रोशित कांग्रेसी कार्यकर्ता पुलिस के बैरिकेड्स को तोड़ते हुए परेड ग्राउंड की तरफ आगे बढ़ गए। इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। कांग्रेसी कार्यकर्ता परेड ग्राउंड के मुख्य गेट पर पहुंचे, जहां गेट बंद देखकर कई कार्यकर्ता गेट से छलांग लगाते हुए अंदर घुस गए और गेट पर लगा ताला तोड़ दिया। इसके बाद मैदान के अंदर जमकर नारेबाजी और हंगामा हुआ। हालांकि, जब प्रशासन टस से मस नहीं हुआ, तो शीर्ष नेताओं ने सूझबूझ दिखाते हुए बन्नू स्कूल ग्राउंड में ही रैली करने का अंतिम निर्णय लिया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता यशपाल आर्य ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा, "परेड ग्राउंड पूरा खाली है। हमने बकायदा नगर निगम से अनुमति मांगी थी और उन्होंने हमें अनुमति दी भी थी। इसके लिए ₹1,77,000 का शुल्क भी एडवांस में जमा किया गया था। इसके बावजूद ऐन वक्त पर अनुमति निरस्त करना यह साबित करता है कि भाजपा सरकार राहुल गांधी से बुरी तरह डरी और खौफजदा है। वह नहीं चाहती कि देहरादून में राहुल गांधी की कोई सफल रैली हो। 

वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, "सरकार की इस ओछी हरकत से कांग्रेस डरने वाली नहीं है। भाजपा सरकार पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है और प्रदेश को गर्त में धकेलने वाली इस सरकार का पतन अब शुरू हो चुका है। जहां नौजवान खड़ा होता है, वहां एक नई लकीर खिंच जाती है। उत्तराखंड अब बदलाव मांग रहा है और 17 जुलाई को होने वाली राहुल गांधी की यह रैली ऐतिहासिक होगी। उत्तराखंड में पिछले 10 वर्षों से भाजपा सत्ता में काबिज है। साल 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में लगातार मिली हार के बाद कांग्रेस वर्तमान में महज 19 विधायकों के साथ विपक्ष में है। साल 2027 में होने वाले आगामी उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राहुल गांधी की इस रैली को कांग्रेस के बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। अब तक राज्य के 5 विधानसभा चुनावों में से कांग्रेस 2 बार और बीजेपी 3 बार सत्ता का स्वाद चख चुकी है। ऐसे में कांग्रेस इस बार सत्ता में वापसी के लिए पूरा जोर लगा रही है। राहुल गांधी ने इन दिनों देश भर के युवाओं और छात्रों को एकजुट करने के लिए 'छात्रों की गूंज' नामक एक बड़ा संगठनात्मक अभियान शुरू किया है। राजस्थान के कोटा शहर से शुरू हुए इस अभियान के तहत राहुल गांधी एनएसयूआई और कांग्रेस के सभी अग्रिम प्रकोष्ठों के साथ मिलकर जिला स्तर तक छात्रों के बीच पहुंच रहे हैं। इस संवाद कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश और राज्य में हो रहे पेपर लीक, विभिन्न भर्ती घोटालों, लगातार महंगी होती शिक्षा और वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की कमियों जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सीधे छात्रों से बातचीत करना है। देहरादून के बन्नू स्कूल मैदान में 17 जुलाई को होने वाले इस कार्यक्रम में भी राहुल गांधी इन्हीं मुद्दों पर उत्तराखंड के युवाओं के साथ हुंकार भरेंगे। प्रशासन के अड़ंगे के बाद अब इस रैली पर पूरे प्रदेश की नजरें टिक गई हैं।


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