रांची रेल मंडल का ऐतिहासिक कदम: स्लम बस्तियों के बच्चों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय स्तर का नि:शुल्क खेल प्रशिक्षण, तैयार होंगे भविष्य के चैंपियन
रांची। झारखंड की खेल प्रतिभाओं को वैश्विक पटल पर नई पहचान दिलाने और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के सपनों को पंख देने के लिए रांची रेल मंडल ने एक बेहद सराहनीय और बड़ी सामाजिक पहल की है। मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) की दूरदर्शी सोच के बाद अब रांची रेलवे क्षेत्र में खेल अकादमियों के विस्तार की योजना को युद्धस्तर पर गति दी जा रही है। इस योजना की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इसका लाभ न केवल रेलवे कर्मचारियों के बच्चों को मिलेगा, बल्कि रेलवे ट्रैक और कॉलोनियों के आसपास की स्लम (मलीन) बस्तियों में रहने वाले उन प्रतिभावान बच्चों को भी मिलेगा जो पैसों के अभाव में अपनी प्रतिभा का गला घोंटने को मजबूर थे। इन बच्चों को रेलवे अपने अंतरराष्ट्रीय स्तर के इंफ्रास्ट्रक्चर में पूरी तरह मुफ्त (नि:शुल्क) ट्रेनिंग देगा।
रांची रेल मंडल के पास खेलों के लिए देश के बेहतरीन और अंतरराष्ट्रीय स्तर के मैदान व सुविधाएं मौजूद हैं। यहाँ के कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय रेलवे और देश का मान बढ़ाया है। हालांकि, लंबे समय से यह जरूरत महसूस की जा रही थी कि इन विश्वस्तरीय संसाधनों का उपयोग शुरुआती जमीनी स्तर (ग्रासरूट लेवल) पर नई पौध को तैयार करने के लिए किया जाए। इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए रेलवे ने अपनी अकादमियों के द्वार गरीब बच्चों के लिए खोल दिए हैं, ताकि संसाधनों की कमी के कारण कोई 'एम.एस. धोनी' या 'जयपाल सिंह मुंडा' बनने से न चूक जाए। वर्तमान में रेलवे परिसर के अत्याधुनिक खेल मैदानों में क्रिकेट, फुटबॉल और हॉकी के नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरी शिद्दत के साथ संचालित किए जा रहे हैं। फुटबॉल मैदान के एक हिस्से में विशेष क्रिकेट अकादमी चल रही है, जहाँ बच्चों की तकनीक पर काम किया जा रहा है। वर्तमान में 50 से अधिक बच्चे अलग-अलग खेलों में पसीना बहा रहे हैं और यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। रेलवे की आगामी योजना के अनुसार, बहुत जल्द चेस (शतरंज), वॉलीबॉल और फुटबॉल के लिए पूरी तरह समर्पित अलग अकादमियां शुरू की जाएंगी। अधिकारियों का कहना है कि बच्चों को बहुत छोटी उम्र से ही व्यवस्थित और वैज्ञानिक पद्धति से प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे तकनीकी रूप से इतने मजबूत बन सकें कि सीनियर स्तर पर पहुँचते ही राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मेडल जीत सकें। इस पूरी मुहिम की सबसे खास बात यह है कि इसका उद्देश्य रेलवे के लिए किसी भी तरह का राजस्व (कमाई) अर्जित करना नहीं है। वर्तमान में क्रिकेट प्रशिक्षण के लिए रेलवे कर्मचारियों के बच्चों से मात्र ₹1000 का मामूली शुल्क लिया जाता है, जबकि स्लम बस्तियों के बच्चों के लिए यह विश्वस्तरीय सुविधा 100% नि:शुल्क है। प्रशिक्षण की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया गया है। बच्चों को निखारने के लिए झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े सर्टिफाइड कोचों की सेवाएं ली जा रही हैं। इसके साथ ही, रेलवे के कई वरिष्ठ और राष्ट्रीय स्तर के अनुभवी खिलाड़ी भी समय-समय पर बच्चों को मार्गदर्शन और मेंटरशिप दे रहे हैं। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस मुहिम का अंतिम लक्ष्य केवल कुछ चुनिंदा खिलाड़ी तैयार करना नहीं, बल्कि पूरे समाज में एक सकारात्मक खेल संस्कृति को मजबूत करना है। यदि बच्चों को बचपन में ही सही वातावरण, आधुनिक खेल उपकरण और अनुभवी गुरुओं का सानिध्य मिल जाए, तो वे कमाल कर सकते हैं। रांची रेल मंडल के इस बेहतरीन कदम को खेल समीक्षक झारखंड के खेल इतिहास का एक टर्निंग पॉइंट मान रहे हैं, जिससे आने वाले कुछ ही सालों में देवघर, रांची और धनबाद जैसे क्षेत्रों से अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई नए और धाकड़ खिलाड़ी देश को मिलने तय हैं।