रांची में भीषण हादसा: बंद कमरे में अंगीठी बनी काल, मां और ढाई साल के मासूम की दम घुटने से मौत,दो की हालत नाजुक
रांची। राजधानी रांची के रातू थाना क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक और आंखें नम कर देने वाला वाकया सामने आया है। यहाँ चटकपुर इलाके में एक बंद कमरे के भीतर जलते कोयले के चूल्हे (अंगीठी) से निकली जहरीली गैस ने एक हंसते-खेलते परिवार को तबाह कर दिया। दम घुटने के कारण 40 वर्षीय मां और उनके महज ढाई साल के मासूम बेटे की दर्दनाक मौत हो गई। वहीं, मृतका की साढ़े तीन साल की मासूम बेटी और 17 साल की ननद की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। दोनों जिंदगी और मौत के बीच अस्पताल में जंग लड़ रही हैं। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है।
जानकारी के मुताबिक, मूल रूप से बिहार के छपरा की रहने वाली 40 वर्षीय पिंकी देवी चटकपुर स्थित एक किराये के मकान में अपने दो बच्चों और ननद के साथ रहती थीं। शुक्रवार की रात पिंकी देवी ने रोज की तरह कोयले के चूल्हे पर रात का खाना पकाया। परिवार के सभी सदस्यों ने एक साथ बैठकर खाना खाया। लेकिन, भोजन करने के बाद एक छोटी सी लापरवाही भारी पड़ गई। पिंकी देवी जलते हुए कोयले के चूल्हे को कमरे से बाहर निकालना भूल गईं और कड़कड़ाती ठंड या सुरक्षा के लिहाज से कमरे का दरवाजा और खिड़कियां पूरी तरह बंद कर सो गईं। रात के सन्नाटे में बंद कमरे के भीतर कोयले से निकलने वाली जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस धीरे-धीरे फैलती गई। कमरे में वेंटिलेशन (हवा आने-जाने का रास्ता) न होने के कारण यह गैस कमरे में ही जमा हो गई और सोते हुए चारों लोगों के फेफड़ों में समा गई। शनिवार की सुबह जब काफी देर हो जाने के बाद भी पिंकी देवी के कमरे का दरवाजा नहीं खुला, तो आसपास के पड़ोसियों को अनहोनी की आशंका हुई। लोगों ने आवाज लगाई, दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई हलचल नहीं हुई। इसके बाद स्थानीय लोगों ने किसी तरह मशक्कत कर दरवाजे को तोड़ा। जैसे ही लोग कमरे के भीतर दाखिल हुए, वहां का नजारा देखकर सबकी आंखें फटी की फटी रह गईं। कमरे के भीतर पिंकी देवी, उनके दोनों मासूम बच्चे और 17 वर्षीय ननद अचेत अवस्था में बिस्तर पर पड़े हुए थे। स्थानीय निवासियों ने तत्परता दिखाते हुए तुरंत सभी को पास के अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल लाते ही डॉक्टरों ने पिंकी देवी और उनके ढाई साल के बेटे का स्वास्थ्य परीक्षण किया और उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक, दोनों की मौत अस्पताल पहुंचने से काफी पहले ही दम घुटने के कारण हो चुकी थी। वहीं, इस भयावह हादसे में पिंकी देवी की साढ़े तीन साल की बेटी और 17 वर्षीय ननद की सांसें चल रही थीं, लेकिन उनकी हालत अत्यंत गंभीर बनी हुई है। डॉक्टरों की विशेष टीम दोनों को बचाने की हरसंभव कोशिश कर रही है और वे गहन चिकित्सा कक्ष में उपचाराधीन हैं। घटना की सूचना मिलते ही रातू थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस ने कमरे से वह कोयले का चूल्हा भी बरामद कर लिया है, जो इस काल का कारण बना। शुरुआती जांच और परिस्थितियों से साफ है कि मां और बच्चे की मौत दम घुटने की वजह से हुई है। जिस कमरे में यह हादसा हुआ, वहां वेंटिलेशन का कोई रास्ता नहीं था। खिड़की-दरवाजे पूरी तरह बंद होने के कारण जहरीली गैस बाहर नहीं निकल पाई और यह दर्दनाक हादसा हो गया। मामले की गहन छानबीन की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर बंद कमरों में कोयले या लकड़ी की अंगीठी जलाने के खतरों को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब बंद जगह पर कोयला जलता है, तो ऑक्सीजन की कमी के कारण अत्यंत जहरीली 'कार्बन मोनोऑक्साइड' गैस बनती है। इस गैस की न तो कोई गंध होती है और न ही रंग, जिससे सोते हुए इंसान को इसका पता भी नहीं चलता और वह हमेशा के लिए मौत की नींद सो जाता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि सर्दियों या खाना पकाने के दौरान बंद कमरों में अंगीठी या हीटर का प्रयोग करते समय वेंटिलेशन का विशेष ध्यान रखें।